Krishna Makhan Chori Leela 1

Krishna Makhan Chori Leela 1

Aisa kon hoga jisne bhagwan Shri krishna ki baal leela ko nahi suna hoga or baal leela me viseshkar makhan chori leela. makhan chori leela bhagwaan ne isliye ki kyonki gopiyan bhagwaan se prem karti thi. or bhagwaan apni leela ke madhyam se prem bantna chahte they. padhiye krishna makhan chori leela

 

ऐसा कोन होगा जिसने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला को नहीं सुना होगा और बाल लीला में विशेषकर माखन चोरी लीला। माखन चोरी लीला भगवान ने इसलिए की क्योकि गोपियाँ भगवान से प्रेम करती थी। और भगवान अपनी लीला के माध्यम से उन्हें प्रेम देना चाहते थे। और वास्तव में भगवान माखन चोर नहीं है वो तो चित-चोर है। एक बार जो उनकी लीला को सुन लेगा- देख लेगा फिर उसे संसार से क्या मतलब? भगवान ब्रज में नित्य ऐसी लीला करते रहते थे। एक बड़ी सुन्दर लीला आप पढ़िए और सिर्फ पढ़िए नहीं मन की आँखों से थोड़ा दर्शन कीजिये, मेरे गुरुदेव कहते है की चिंतन कीजिये-
एक बार की बात है भगवान अपनी टोली के साथ तैयार हुए। भगवान के मित्र(friend) बने है सुबल(subal), मंगल(mangal), सुमंगल(sumangal), श्रीदामा(sridama), तोसन(tosan), आदि। भगवान सोच रहे है की आज किसके घर माखन चोरी की जाये। याद आया की “चिकसोले वाली” गोपी के घर चलते है। भगवान पहुंच गए सुबह सुबह और जोर से दरवाजा खटखटाने लगे। गोपी ने दरवाजा खोला। तो श्रीकृष्ण को खड़े देखा। बाल बिखेर रखे थे, मुह पर उबासी थी। गोपी बोली – ‘अरे लाला! आज सुबह-सुबह यहाँ कैसे?

 

कन्हैया बोले – ‘गोपी क्या बताऊँ! आज सुबह उठते ही, मैया ने कहा लाला तू चिकसोले वाली गोपी के घर चले जाओ और उससे कहना आज हमारे घर में संत आ गए है मैंने तो ताजा माखन निकला नहीं, चिकसोले वाली गोपी तो भोर में उठ जावे है।ताजो माखन निकल लेवे है। तू उनसे जाकर माखन ले आ। और कहना कि एक मटकी माखन दे दो, बदले में दो मटकी माखन लौटा दूँगी।
गोपी बोली – लाला! मै अभी माखन की मटकी लाती हूँ और मैया से कह देना कि लौटने की जरुरत नहीं है संतो की सेवा मेरी तरफ से हो जायेगी ।झट गोपी अंदर गयी और माखन की मटकी लाई और बोली – लाला ये माखन लो और ये मिश्री भी ले जाओ। कन्हैया माखन लेकर बाहर आ गए और गोपी ने दरवाजा बंद कर लिया।
अब भगवान ने अपने सभी दोस्तों को बुलाया है और कहते है आओ आओ श्रीदामा, मंगल, सुबल, जल्दी आओ, सब-के-सब झट से बाहर आ गए भगवान बोले,” जिसके यहाँ चोरी की हो उसके दरवाजे पर बैठकर खाने में ही आनंद आता है, और वो चोरी भी नहीं कहलाती है।” झट सभी गोपी के दरवाजे के बाहर बैठ गए, भगवान ने सबकी पत्तल पर माखन और मिश्री रख दी। और बीच में स्वयं बैठ गए। सभी सखा माखन और मिश्री खाने लगे।

माखन के खाने से होंठो की पट पट और मिश्री के खाने से दाँतो के कट-कट की आवाज जब गोपी ने सुनी तो सोचा ये आवाज कहाँ से आ रही है , कोई बंदर तो घर में नही आ गयो है।

 

जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो सारे मित्रों के साथ श्रीकृष्ण बैठे माखन खा रहे थे। गोपी बोली – ‘क्यों रे कन्हैया! माखन संतो को चाहिए था या इन संड-भुसंडान को।

भगवान बोले देख गोपी गाली मत दीजो। ये भी संत है, साधु है। और तो और नागा साधु है किसी के तन पर कोई वस्त्र तक नहीं है।
तुझे तो इनको प्रणाम करना चाहिए और वो भी दंडवत(लेट कर)। गोपी बोली अच्छा अभी दण्डोत करती हूँ। एक डंडा ले आउ फिर अच्छे से डंडे से दण्डोत करुँगी।

भगवान बोले सबको बेटा माखन बहुत खा लिए है अब पीटने का नंबर है। भागो सभी अपने-अपने घर को। इस प्रकार भगवान ब्रज में सुन्दर लीला कर रहे है और सबको अपने रूप मधुरए से सराबोर कर रहे है।

बोलिए माखन चोर भगवान की जय। (Boliye Makhan Chor Bhagwan ki jai )

16 thoughts on “Krishna Makhan Chori Leela 1

  1. yeah its very nice... i have to write krishan ji ke 5 lilayen as my homework which i founded here....thanks. says:

    Yeah its very nice… i have to write krishan ji ke 5 lilayen as my homework which i founded here….thanks.

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