Krishna Davanal(agni) paan and Pralambasura vadh

Krishna Davanal(agni) paan and Pralambasura vadh

कृष्ण दावानल(अग्नि) पान और प्रलम्बासुर वध 

भगवान श्री कृष्ण(Shri Krishna) ने काली नाग(Kali Naag) का दमन(Daman) किया है। जब भगवान कालिया का मर्दन कर रहे थे तब सभी गोप , गोपियाँ, ग्वाल बाल, और नन्द यशोदा सभी वहीँ आ गए थे। और सभी कृष्ण के सकुशल होने की कामना कर रहे थे। जब भगवान काली देह से बाहर आये तो उनके सारे  मित्रो और सम्बन्धियों ने उन्हें यमुना तट पर देखा। वृन्दावन के वासियों, ग्वालों, माता यशोदा, रोहिणी मैया और नन्द महाराज और सारी गाय और बछड़ो ने कृष्ण को यमुना से वापस आते देखा तो लगा की उनके प्राण वापिस आ गए हो। सभी ने कृष्ण को गले से लगाया और शांति का अनुभव किया। बलराम ने भी कृष्ण का आलिंगन किया। आज सभी बहुत प्रसन्न हैं।

 

Davanal(Davagni) Paan : दावानल(दावाग्नि) पान 

चूँकि रात हो चुकी थी और गोवो तथा बछड़ो समेत वृन्दावन के सभी वासी थके हुए थे तो सभी ने यमुना नदी-तट पर ही विश्राम करने का निश्चय किया। अर्धरात्रि में , जब सभी सोये हुए थे तो अचानक एक विशाल दावाग्नि dawagni(आग) लग गई। ऐसा लग रहा था जैसे की सब कुछ जल कर भस्म हो जायेगा। जब जिसके साथ कृष्ण हो, बलराम हो उनका बाल भी बांका नही हो सकता हैं। जब सभी को आग की तपन हुई तो सभी कहने लगे हे कृष्ण! हे भगवान! हे प्यारे बलराम! आप हमें इस विनाशकारी आग से बचाइये। हमारे पास तुम्हारे शिवा कोई शरण नहीं हैं। ऐसा लग रहा हैं जैसे कोई शिशु डर कर अपनी माँ के पास गोदी में चला गया हैं।
जब सभी ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की तो दीनदयाल ने देर नही लगाई। झट से उस दावाग्नि(davagni) को निगल गए और उन्हें बचा लिया। क्योंकि भगवान श्री कृष्ण सब कुछ करने में समर्थ हैं। जिस स्थान पर यह लीला हुई उसे दावानल कुण्ड(davanal Kund) कहते हैं।

विनाशकारी अग्नि का पान करने के बाद भगवान सभी ब्रजवासियों सहित वृन्दावन में पधारे हैं। इसके बाद ग्रीष्म ऋतू आई हैं। जिस ऋतू का शुकदेव जी ने सुंदर वर्णन किया हैं। और वृन्दावन के अलोकिक रूप का भी वर्णन किया हैं। भगवान श्री कृष्ण ग्वाल बालों के साथ ग्रीष्म ऋतू का आनंद ले रहे हैं। कभी भगवान नाचते हैं, कभी खेलते हैं और कभी गाते हैं।

 

Balram Killed(Vadh) pralambasura : बलराम जी द्वारा प्रलम्बासुर वध 

इस तरह जब वो दिव्य लीला कर रहे थे तो एक प्रलम्बासुर(Pralambasura) नामक असुर आया हैं। ये भगवान श्री कृष्ण(Shri Krishan) और बलराम(Balram) दोनों को चुराने के लिए आया था। भगवान कृष्ण एक ग्वाल बाल का अभिनय कर रहे थे, इस असुर ने रूप बदला और भगवान की टोली में जा घुसा। पर भगवान तो सब जानते हैं। अब कृष्ण सोचने लगे की इसका वध कैसे किया जाये।

भगवान श्री कृष्ण कहते है मित्रो सभी 2 टोली में बंट जाओ। एक टोली के नायक होंगे बलराम जी और दूसरी टोली का मैं स्वयं। सभी ग्वाल बाल(gwal baal) आधे-आधे बंट गए। खेल के अनुसार हरे हुए जोड़े को अपनी पीठ पर जितने वाले जोड़े को बिठाना होगा। इस खेल में बलराम की टोली जीत गई। भगवान कृष्ण ने हरने के कारण श्रीदामा(sridama) को अपनी पीठ पर बिठाया और भद्रसेन(bhadrsen) ने वृषभ को। और उस असुर ने बलराम जी महाराज को अपनी पीठ पर बिठाया क्योंकि वो ग्वाल बालो का रूप ले चूका था।

प्रलम्बासुर बलराम को कृष्ण की टोली से दूर ले गया। लेकिन उसे क्या पता था जो शेष नाग जी पूरी पृथ्वी का भार उठाये हुए हैं वो उन्हें उठा के ले जा रहा हैं। बलराम जी का भार पर्वत के सामान बढ़ने लगा। और वह भार असुर बलराम जी के भार से थकने लगा तो वह अपने असली रूप में आ गया। उसने सुनहरा मुकुट और कुण्डल भरण किये थे ऐसा लग रहा हैं मानो विद्युतमय बादल चन्द्रमा को धारण किये हुए हैं।
बलराम ने देखा की इस असुर का शरीर बादल तक फ़ैल रहा हैं उसकी आंके अग्नि की तरह जल रही हैं और उसके तीक्षण दांत मुह के भीतर चमार रहे हैं। बलराम हैरान हो गए ऐसा असुर पहले कभी नही देखा। बलराम जी समझ गए की ये मुझे मेरे मित्रों से काफी दूर ले आया हैं और मारना चाहता हैं। बलराम जी ने तभी एक मुष्टिक(घूंसा) का प्रहार किया और वह असुर एक चोट खाए हुए सर्प की तरह मुह से रक्त और उल्टी करता हुआ मर गया।
सभी ग्वाल बाल आये और बलराम को गले से लगा लिया। और देवताओ ने बलराम के ऊपर पुष्पवर्षा की हैं।
बोलिए बलराम जी महाराज की जय !! Balram ji ki jai !!

 

ग्वाल बालों की अग्नि से रक्षा : Krishna saved gawal-baal From Fire

इस तरह से भगवान एक बार फिर ग्वाल बालों(gwal-baal) के साथ गाय चरा रहे थे। हरी घास चरने के लालच में गाय, भैंस और बकरियां इषेिकाटवी वन में पहुंच गई। क्योंकि उस वन में घास बहुत था। वहां पहुंच कर देखा की दावाग्नि(जंगल की आग) लगी हुई हैं। सब चीत्कार करने लगी। जब कृष्ण, बलराम और ग्वाब बालों ने पशुओ को नही देखा तो सब बहुत चिंतित हुए। और उनके पदचिह्नों का अनुसरण करते हुए ढूंढने लगे। सब ग्वाल बाल चिंतित थे की उनकी आजीविका का साधन अब समाप्त हो जायेगा। भगवान कृष्ण अपनी गइयां का नाम पुकारने लगे। इतने में आग ने चारों और से सबको घर लिया। जैसे जैसे हवा चलती लपटे और विशाल रूप ले रही थी। सभी भयभीत थे। सब कह रहे थे हे कृष्ण! हे बलराम! हमारी रक्षा करो।
हम जानते हैं की आप हमारी इस आग से रक्षा कर सकते हो।
तब भगवान ने आग की सभी लपटों का पान(पीना) कर डाला। पर सभी को काल के गाल से बचा लिया। सभी ग्वाल बालों ने भगवान को धन्यवाद दिया हैं। सभी ये सोचने लगे हैं की कृष्ण कोई साधारण बालक नही देवता हैं।
और भगवान मंद मंद बंसी बजाते हुए वृन्दावन में पधार रहे हैं। और गोपियाँ जिनके दर्शन को लालायित रहती हैं।

बोलिए कृष्ण चन्द्र भगवान की जय। बलराम जी महाराज की जय!! Shri Krishan and Balram ji ki Jai!!

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