X Karma Akarma Vikarma

Karma Akarma Vikarma Kya Hai | Shrimad Bhagwat Geeta

Karma Akarma Vikarma Kya Hai | Shrimad Bhagwat Geeta

कर्म अकर्म विकर्म क्या है | श्रीमद भगवत गीता

What is Karma Akarma Vikarma in hindi?

 

अर्जुन भगवान श्री कृष्ण से पूछता है – कर्म अकर्म विकर्म क्या है(Karma Akarama Vikarma Kya hai)

श्री कृष्ण बताते हैं कि – हे अर्जुन! जब मनुष्य निष्काम भावना से कर्म करता है तब उस कर्म का फल उसे नहीं भोगना पड़ता। इसलिए वो अकर्म(Akarma) हो जाता है।

कर्म उसे कहते हैं – जो सकाम भाव से, फल की इच्छा से किया जाता है। उसका फल कर्म के अनुसार अवश्य मिलता है। अच्छे कर्म का अच्छा और बुरे का बुरा।

विकर्म(Vikarma) – असत्य, कपट, हिंसा आदि अनुचित और निषिद्ध कर्म विकर्म(Vikarma) है।

 

अर्जुन पूछता है – इसका अर्थ केशव! युद्ध विकर्म(Vikarma) है? क्योंकि इसमें हिंसा है।

 

कृष्ण मुस्कुराकर कर कहते हैं – हे पार्थ! तुम अब भी अज्ञान के अंधकार में भटक रहे हो। इसलिए ऐसी बातें कर रहे हो। मैंने अभी तुम्हें बताया कि कर्म जिस भावना से किया जाये, उसी से वो पाप या पुण्य होता है। युद्ध यदि अपना धर्म समझकर, अधर्म का, अन्याय का नाश करने के लिए किया जाये तो उस युद्ध में मरने पर भी प्राणी को स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इसलिए तुम सारी शंका, कुशंका को त्याग दो और युद्ध करो।

Read : कर्मयोग क्या है?

Read : आत्मा और शरीर क्या है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.