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Dantavakra and Viduratha story in hindi

Dantavakra and Viduratha story in hindi

दन्तवक्त्र और विदूरथ का वध कहानी/कथा 

Dantavakra Vadh(Death) : दन्तवक्त्र का वध

 

शिशुपाल, शाल्व और पौण्ड्रक के मारे जाने पर उनकी मित्रता का ऋण चुकाने के लिये दन्तवक्त्र अकेले ही युद्धभूमि में आ गया। ये बड़ा शक्तिशाली था और पैदल ही आया था एक गदा लेकर। और भगवान श्री कृष्ण से कहता है- कृष्ण! तुम मेरे मामा के लड़के हो, इसलिये तुम्हें मारना तो नहीं चाहिये; परन्तु एक तो तुमने मेरे मित्रों को मार डाला है और दूसरे एक मुझे भी मारना चाहते हो। इसलिए आज मैं तुम्हें अपनी वज्रकर्कश गदा से चूर-चूर कर डालूँगा।

भगवान श्री कृष्ण ऐसा सुनते ही रथ से उतरे और गदा लेकर दन्तवक्त्र से भयंकर युद्ध करने लगे। भगवान ने जैसे ही गदा का प्रहार किया तो दन्तवक्त्र का कलेजा फट गया। वह मुँह से खून उगलने लगा। उसके बाल बिखर गये, भुजाएँ और पैर फ़ैल गये। उसके प्राण निकल गए। दन्तवक्त्र के मृत शरीर से एक अत्यन्त सूक्ष्म ज्योति निकली और वह बड़ी विचित्र रीति से भगवान श्रीकृष्ण में समा गयी ।

 

 

Viduratha Vadh(Death) : विदूरथ का वध 

दन्तवक्त्र के भाई नाम था विदूरथ। जब उसे अपने भाई की मृत्यु का समाचार पता चला तो ये भी भगवान से युद्ध करने के लिए आया। वह क्रोध के मारे लम्बी-लम्बी साँस लेता हुआ हाथ में ढाल-तलवार लेकर भगवान श्रीकृष्ण को मार डालने की इच्छा से आया। लेकिन भगवान श्री कृष्ण ने अपने छुरे के समान तीखी धार वाले चक्र से किरीट और कुण्डल के साथ उसका सिर धड़ से अलग कर दिया ।

 

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