Bhagwan : भगवान

Bhagwan : भगवान 

 

 

भगवान(Bhagwan) शब्द का अर्थ संत महात्मा लोग बताते हैं। भगवान वो है जिसकी हम पूजा करती है। भगवान की हम भक्ति करते हैं। कुछ लोग बताते हैं – 

भगवान में पांच शब्द आते हैं- 1. भ 2. ग 3. व 4. आ 5. न

जिनका अर्थ इस प्रकार से है-

 

से – भूमि

से – गगन

से – वायु

से – अग्नि

से – नीर (पानी)

 

जो भूमि में भी है, जो आकाश में भी है, जो वायु में भी है , जो अग्नि में भी है और जो आकाश में भी है वो भगवान है। जो हर जगह विद्यमान है वो भगवान है।

 

 

भगवान शब्द भज धातु से बना है। जो काम, क्रोध , लोभ, मोह , अहंकार , अधर्म सब दोषों से परे है वो भगवान है।

 

भगवान को ईश्वर , अल्लाह , गॉड , इसा , ब्रह्म, परमात्मा, परमेश्वर आदि नामों से जाना जाता है।

 

योगी जिसे परमात्मा कहता है। ज्ञानी जिसे ब्रह्म कहता है और भक्त भगवान कहता है।

 

हिन्दू धर्म में मुख्य रूप से तीन भगवानों के बारे में बताया गया है। ब्रह्मा, विष्णु और महेश। ब्रह्मा जी सृष्टि का निर्माण करते हैं। विष्णु जी सृष्टि का पालन करते हैं और महेश जी(भगवान शिव) उसका विनाश कर देते हैं।

 

इंग्लिश में अगर हम गॉड शब्द का अर्थ देखें तो यही संत महात्मा यही बताते हैं-  God

God Meaning in hindi : गॉड का हिंदी में अर्थ

G-  Generate(produce or create) जिसका अर्थ है जो बनाता है, सृष्टि को पैदा करता है ।

 

O- Operate ( control the functioning of (a machine, process, or system) इसका अर्थ है जो सञ्चालन करता है। ठीक तरह से किसी प्रोसेस को चलता है।

 

D- end the existence of (something) by damaging or attacking it. इसका अर्थ है जो नष्ट कर देता है।

 

इस तरह से ब्रह्मा जी हमारे जन्म के कारक हैं। विष्णु का दायित्व है हमारा पालन करने का। और शिव जी हमे मृत्यु प्रदान करते हैं।

 

 बाकि सब भगवान इन तीनों के अवतार माने जाते हैं। जिनमे मुख्यतः राम, कृष्ण, हनुमान , रुद्र आदि प्रमुख हैं।

 

इसके बाद भगवान की शक्तियां आती हैं। जो भगवान की धर्म पत्नियां भी हैं। ब्रह्मा जी की धर्म पत्नी सरस्वती माता हैं। विष्णु जी की पत्नी लक्ष्मी जी हैं। और भगवान शिव की पत्नी पार्वती माता है। 

Read : शिव पार्वती विवाह की कथा

 

अब हमारे दिमाग में कई तरह के प्रश्न आते हैं। जिन सबके उत्तर आपको मिलते जायेंगे। आप पढ़ते जाइये-

  1. क्या भगवान है?(Kya Bhagwan hai)
  2. भगवान को किसने बनाया?(Bhagwan ko kisne banaya)
  3. भगवान कहाँ रहते हैं? (Bhagwan kahan rehte hai)
  4. भगवान सबके अंदर, हर चीज में है तो दिखाई क्यों नहीं देता?(Bhagwan sabke andar hai, hari chij me hai to dikhai kyo nhi dete)
  5. भगवान की भक्ति कैसे करें? (Bhagwan ki bhakti kaise kare)
  6. भगवान को पाने का उपाय (Bhagwan ko pane ka upay)
  7. भगवान साकार(सगुण) है या निराकार(निर्गुण)? Bhagwan sakar(Sagun) hai ya Nirakar(Nirgun)
  8. भगवान किसको मिलते हैं? (Bhagwan kisko milte hai)
  9. भगवान कैसे दिखते हैं? (Bhagwan kaise dikhte hai)
  10. भगवान की खासियत/विशेषता क्या है? (Bhagwan ki khasiyat, quality , visheshta kya hai)

 

  1. क्या भगवान है? (Kya Bhagwan hai) Does god exist in hindi 

जी हाँ, भगवान है। अगर भगवान नहीं होता तो हमारा मरना, जीना, ये प्रकृति, ये पेड़ पौधे, ये सूर्य, चंद्र, ग्रह, उपग्रह, इन सबका सञ्चालन कौन करता। थोड़ा सोचिये, हम ऑफिस में काम क्यों करते हैं क्योंकि हमारा बॉस हमे काम देता है। इसलिए हम काम करते हैं। ठीक इसी तरह से सबका बॉस, सबका नियंत्रण करने वाले भगवान हैं।

 

इतनी बड़ी सृष्टि कोई इंसान हैंडल नहीं कर सकता है। भगवान ने ही पूरा उत्तर दायित्व संभाल रखा है।  अगर आप नास्तिक ही हैं तो फिर इस खोज में क्यों है कि भगवान है? और अगर आप आस्तिक है तो खुद पर या भगवान पर विश्वास रखिये। इस शंका में कभी मत रहना कि भगवान हैं या नहीं है? या तो आप पुरे आस्तिक बने रहना या पुरे नास्तिक। पर जो भी बने रहना वास्तविक बने रहना।  थोड़ा सोचिये, हमारा दिल धड़कता है, हमारे सोने के बाद भी धड़कता रहता है। क्या ये किसी इंसान का काम है?

हमारे शरीर के भीतर आत्मा के रूप में परमात्मा का अंश बैठा हुआ है। जिस कारण से हमारा दिल धड़कता है। जब आत्मा निकल जाती है तो केवल मृत शरीर रह जाता है।

इसी तरह से हम श्वांस लेते हैं। सोते समय भी हमारी श्वास चलती रहती है। ये सब भगवान ही तो कर रहे हैं।

 

  1. भगवान को किसने बनाया- (Bhagwan ko kisne Banaya)

 भगवान को किसी ने भी नहीं बनाया है और ना ही भगवान को कोई बना सकता है। भगवान तो खुद ही प्रकट हुए हैं। भगवान की उत्पत्ति स्वत : हुई है। उन्होंने सृष्टि को जरूर बनाया है। हमे बनाया, तुम्हे बनाया, प्रकृति को बनाया। और जीव, जंतु सबको बनाया है।

 

  1. भगवान कहाँ रहते हैं- (Bhagwan Kahan rehte hai)

भगवान तो हर जगह मजूद हैं। लेकिन हमारी आँखें ही उन्हें देख नहीं पाती। वो कण-कण में विद्यमान है। फिर भी संत महात्माओं ने भगवान के रहने के स्थान बताये हैं। आप नीचे दिए गए ब्लू लिंक पर क्लिक करके पढ़ लीजिये-

goo.gl/KodWkF

 

  1. भगवान सबके अंदर, हर चीज में है तो दिखाई क्यों नहीं देता? (Bhagwan sabke andar, har chij me hai to dikhai kyo nhi dete )

भगवान को देखने के लिए हृदय की आँखों की जरुरत होती है। इन संसार के चर्म चक्षु की नहीं। थोड़ा विचार कीजिये, सूरदास जी तो जन्म से अंधे थे उन्हें भी भगवान के दर्शन होते थे। अगर आँख वालों को ही दर्शन होते तो भगवान को भगवान थोड़ी कह सकते थे। जैसे दूध को मथने पर दही बनती है, और दही को मथने पर माखन मिलता है। इसी तरह से जब हम अपने मन को मथ देते हैं। तो भगवान रूपी माखन हमे दिखने लगता है।

 

  1. भगवान की भक्ति कैसे करें?(Bhagwan ki bhakti kaise kare)

भगवान की भक्ति करने के 9 तरीके श्री प्रल्हाद जी महाराज ने बताये हैं। प्रल्हाद जी ने नवधा भक्ति(Navdha Bhakti) के बारे में बताया है। भक्ति के 9 प्रकार हैं।

 श्रवणं कीर्तनं विष्णोः स्मरणं पादसेवनम्। अर्चनं वन्दनं दास्यं सख्यमात्मनिवेदनम् ॥ (Sharvnam kirnam vishno: samrnam paadsevnam . Archnam vandnam dashyam sakhyaatmnivednam)

 

इनमे से आप कोई भी एक भक्ति कर लीजिये। भक्ति मार्ग में सबसे पहले आता है-

 

  • श्रवण – आप जितना हो सके भगवान की कथा को श्रवण करो। भगवान की कथा सुनने से भगवान में प्रेम बढ़ता है। और आपकी भक्ति सुदृढ़ होती है। क्योंकि भगवान की कथा न स्वर्ग लोक में है, न और कहीं पर।  भगवान की कथा तो केवल वसुंधरा पर ही उपलब्ध होती है। परीक्षित जी महाराज(जो अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के पुत्र हैं) को इस भक्ति में सर्वश्रेठ माना गया है। Read – राजा परीक्षित जी की कथा

 

  • कीर्तन – इसके बाद आता है कीर्तन करना। भगवान का कीर्तन कीजिये। जो भी भजन आपको पसंद लगता है उसे गाइये।  मीरा बाई जब कीर्तन करती थी तो देवता भी आकाश से देखकर हैरान रह जाते थे।  क्योंकि देवता इस धरती पर पैर नहीं रख सकते।  शुकदेव भगवान(वेदव्यास जी के पुत्र) को इस भक्ति का उदाहरण माना गया है। शुकदेव जी ने राजा परीक्षित को श्रीमद भागवत की कथा सुनाई और परीक्षित जी की मुक्ति हो गई। Read – शुकदेव जी की कथा

 

  • स्मरण – जितना हो सके उतना भगवान को याद करो, भगवान का स्मरण करो। एक बात आप भगवान से प्यार करते हैं या नहीं।  ये जानने के लिए एक उपाय बताता हूँ जो मैंने अपने गुरुदेव से सुना है। मान लो आप संसार में किसी से प्रेम करते हैं तो आपको उसे याद करने की जरुरत नहीं होती है। वो खुद ही याद आ जाता/जाती है।  लेकिन अगर आपका भगवान से सच्चा प्रेम होगा तो आपको भी भगवान को याद करने की जरुरत नहीं होगी। बल्कि आपको भगवान खुद ही याद आ जायेंगे।  प्रह्लाद जी महाराज को इस भक्ति में सर्वश्रेठ माना गया है। जब प्रलाह्द जी भगवान विष्णु का ध्यान करने बैठते, भगवान को याद करते थे तब सब कुछ भूल जाते थे। Read : प्रल्हाद जी की कथा

 

  • पादसेवनंभगवान के चरणों की पूजा करो। भगवान के चरणों में बैठो।  जिस तरह से माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु की चरण सेवा करती रहती हैं।

 

  • अर्चनं पांचवी भक्ति भगवान की अर्चना करना। पहले भगवान के एक राजा हुए थे पृथु जी।  इन्होने मन, वचन और कर्म द्वारा भगवान के चरणों की पूजा की।

 

  • वंदना भगवान की वंदना करना छठी भक्ति है। अक्रूर जी ने भगवान को वंदना भक्ति के द्वारा खुश किया। Read- अक्रूर की कहानी

 

  • दास्य भगवान का दास बनकर रहना सातवीं भक्ति है। श्री हनुमान जी महाराज ने भगवान श्री राम का दास बनकर भक्ति की और भगवान को इस भक्ति के द्वारा पा लिया।

Read : राम और हनुमान के मिलन की कहानी

 

  • सख्य – सख्य का अर्थ है सखा-  भगवान के सखा बन जाओ। भगवान से मित्र के रूप में इतना प्रेम करो कि भगवान आपके लिए दौड़े-दौड़े आएं जैसे सुदामा जी के लिए आये थे। सख्य भाव में अर्जुन जी की भक्ति को श्रेष्ठ माना गया है। थोड़ा विचार कीजिये भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बहन सुभद्रा का विवाह अर्जुन के साथ करवा दिया। इस नाते भगवान श्री कृष्ण अर्जुन के साले भी बने हैं। Read : अर्जुन और सुभद्रा के विवाह की कहानी

 

  • आत्मनिवेदनम भगवान की अंतिम और नवमी भक्ति है आत्मनिवेदनम। जिसका अर्थ है अपने आपको भगवान के चरणों में सदा के लिए समर्पण कर देना और कुछ भी अपनी स्वतंत्र सत्ता न रखना। यह भक्ति की सबसे उत्तम अवस्था मानी गई हैं। इस भक्ति के उदाहरण राजा बलि को माना गया है। राजा बलि ने अपना सब कुछ भगवान विष्णु को दे दिया। जो वामन बनकर तीन पग पृथ्वी मांगने आये थे। Read राजा बलि और भगवान वामन की कथा

 

इस तरह से नवधा भक्ति के नौ 9 रूप बताये गए हैं। रामचरितमानस में भी भक्ति के 9 रूप भगवान राम ने माता शबरी को बताये हैं। उसकी कथा आप नीचे दिए ब्लू लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं-

https://goo.gl/WG7dNQ

 

  1. भगवान को पाने का उपाय (Bhagwan ko pane ka upay)

भगवान को पाने का उपाय क्या है? भगवान को पाने का तरीका क्या है?

चलिए थोड़ा चिंतन करते हैं। हमें तो भगवान मिले है या नहीं ये तो हम जानते हैं या भगवान जी। लेकिन जिन्हे भगवान मिले हैं उन्हें किस तरह से मिले? मीरा बाई, सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास, हरिदास, रसखान, रहीम, ध्रुव जी, प्रल्हाद जी। इन सबको भगवान मिले हैं। और मरने के बाद नहीं। जीते जी इन्होने भगवान को पाया है। इन्होने भगवान से अपना संबंध जोड़ा और उसे निभाया। इन्होने भगवान से प्रेम किया इसलिए इनको भगवान मिले। भक्ति में 2 चीजों का होना बहुत जरूर है। एक लगन और दूसरा उस लगन में अग्न। जैसे हमे कोई पानी में डुबो दे तो हम बाहर निकलने के लिए छटपटाते हैं। इसी तरह से हमें भगवान की याद में छटपटाना पड़ेगा। भगवान की भक्ति में रोना पड़ेगा। उसकी याद में आंसू बहाने पड़ेंगे। नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके आप पढ़ लीजिये भगवान कैसे मिलेंगे?

https://goo.gl/9Qhxli

 

  1. भगवान साकार(सगुण) है या निराकार(निर्गुण)? Bhagwan sakar(sgun) hai ya nirakar(Nirgun)

 

भगवान साकार है या निराकार ? इस प्रश्न का उत्तर आज भी कुछ लोग ठीक से नहीं जान पाएं हैं। भगवान साकार भी है और निराकार भी है। भगवान के दोनों रूप हैं। ये तो भक्त के ऊपर है कि वो भगवान के किस रूप की पूजा और भक्ति करता है।

 

मेरे पूज्य गुरुदेव कहते हैं भगवान साकार है या निराकार है? वो तो भक्त की भावना के तदाकार है। जैसा भक्त भगवान के रूप का दर्शन करना चाहता है भगवान उस रूप में दर्शन दे देते हैं।

 

भगवान शिव ने रामचरितमानस में ये बात पार्वती जी को बताई है-

अगुन अरूप अलख अज जोई। भगत प्रेम बस सगुन सो होई॥

अर्थ -. भगवान शिव कहते हैं- पार्वती सगुण(साकार) और निर्गुण(निराकार) में कुछ भी भेद नहीं है – मुनि, पुराण, पंडित और वेद सभी ऐसा कहते हैं। जो निर्गुण, अरूप (निराकार), अलख (अव्यक्त) और अजन्मा है, वही भक्तों के प्रेमवश सगुण हो जाता है।

 

  1. भगवान किसको मिलते हैं-(Bhagwan kisko milte hai)

भगवान उसे मिलते हैं जिसके मन में कोई छल, कपट न हो। अगर आप भगवान से प्रेम करते हैं तो भगवान आपके कपट को पटक लगा देंगे। और आप भगवान को पाने के अधिकारी हो जायँगे। कबीरदास और तुलसीदास जी ने बताया है कि भगवान किसको मिलते हैं? नीचे दिए ब्लू लिंक में आप क्लिक करके पढ़ सकते हैं।-

https://goo.gl/YXcsoU

 

 

  1. भगवान कैसे दिखते हैं? (Bhagwan kaise dikhte hai)

सच कहूं तो भगवान बड़े मस्त दिखते हैं। उनके जैसा रूप न किसी ने पाया है और न ही सौंदर्य। थोड़ा विचार कीजिये संसार में कितने सुंदर सुंदर लोग हैं। लेकिन सबसे सुंदर तो भगवान हैं जिन्होंने इन लोगों को बनाया। संसार का सारा सौंदर्य भगवान के एक रोम के बराबर है। अब देखिये भगवान कितने सुंदर होंगे।

 

एक बड़ा प्रसिद्ध कवित्त आता है इसमें – जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी।

जिसकी भगवान के प्रति जैसी भावना होती है वैसे ही भगवान के दर्शन हो जाते हैं। जब कृष्ण भगवान ने कंस को मारा था तब भगवान के लोगों को अनेक रूपों में दर्शन हो रहे थे। कंस को काल के रूप में , किसी को पति के रूप में, बलराम को भाई के रूप में, और उसके उसके मित्रों को मित्र के रूप में भगवान के दर्शन हो रहे थे। Read : कंस वध की कथा

 

इसी तरह से आप जैसा रूप भगवान के लिए सोचते हो भगवान वैसा ही रूप धारण करके आ जाते हैं। सूरदास जी महाराज भगवान के रूप के सुंदर दर्शन करते थे। नीचे दिए लिंक में पढ़िए—

https://goo.gl/nKZM5h

 

 10. भगवान की खासियत/विशेषता क्या है? (Bhagwan ki khasiyat, Quality kya hai)

भगवान शिव ने रामचरितमानस में ये बात पार्वती जी को भगवान की अनंत विशेषता बताई है-

 

भगवान को इंसान की तरह पैरों की जरुरत नहीं है। वो बिना ही पैर के चलता है।

 

 भगवान को हमारी तरह कान की भी जरुरत नहीं है क्योंकि भगवान बिना कान के सुनता है।

 

भगवान को हमारी तरह हाथों की भी जरुआत नहीं है क्योंकि भगवान बिना ही हाथ के अनेकों प्रकार के काम करता है।

 

भगवान बिना मुँह (जिव्हा) के ही सारे (छहों) रसों का आनंद लेता है और बिना ही वाणी के बहुत योग्य वक्ता है।

Read : सम्पूर्ण रामायण कथा 

 

भगवान वह बिना ही शरीर (त्वचा) के स्पर्श करते है। भगवान बिना ही आँखों के देखते है। भगवान बिना ही नाक के सब गंधों को ग्रहण करते है (सूंघते है)।

उस भगवान की करनी सभी प्रकार से ऐसी अलौकिक है कि जिसकी महिमा कही नहीं जा सकती॥

आपके सामने भगवान के बारे में थोड़ा सा लिखने का प्रयास किया है। अगर आपको आर्टिकल पसंद आया है तो लाइक और शेयर जरूर करें। साथ साथ कमेंट भी करें ताकि मैं आपके लिए कुछ नई चीज भी ला सकूँ। जय श्री राम!!

 

 

 

One thought on “Bhagwan : भगवान

  1. Dukh ka karan man hai man ki stithi pe aapka dukh nirbhar karta hai kyuki jindgi ki planning karte hai par planning ke anusar kuch nahi hota isliye mehnat kar aur phir nischincht ho ja chahe mile ya na mile aur logo ki baat nahi Sunni kyu kiwo to tumhe peeth peeche galat aur mooh pe santavana aur baat laaga ke bolege ek dar ka home rahiye dar dar na bhatke yani ki roti ek din me mile ya 10 din me par ek hi darwaze pe as rakhana would hai iswar aur kabhi bhi kisi ka bura na chahana want dosh wichar dosh Karam dosh ko pachanana aur is se bachana ahankar se bachana dukh tab hota hai jab maan ko piyari lagane wali vastu nahi milti ya phir milti hai to jasi Sochi thi waisi nahi hai ya phir milke door ho jati hai to dukh hota hai is maan ko aise vastu do Jo na door Jaye na banawati ho na hi door Jaye wo hai bhawan bhagwan pooran hai apuran sansar me pooranta kha kewal iswar ki hi iccha sukh hai Baki sab mithe keede hai Kate hai to meet ha lagata par dard bhi hota hai bus Hari bol Hari bol Hari Hari bol mukund madhav Hari bol

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