Krishna Muslim Bhakt Raskhan Story in hindi

Krishna Muslim Bhakt Raskhan Story in hindi

भगवान कृष्ण के मुस्लिम भक्त रसखान की कहानी

 

 

रसखान जी कृष्ण के अनन्य भक्त थे। वे मुस्लिम थे लेकिन उनका भगवान से इतना अधिक प्रेम था की देखने वाला देखता ही रहता था। धन्य है भगवान जो किसी भी व्यक्ति की जात-पात नहीं पूछते। भगवान के बारे में यही बात आती है- जात पात पूछे नही कोई, हरि को भजे सो हरि को होइ। अगर आप भक्ति मार्ग पर हैं तो आपको कुछ भी सोचने की जरुरत नहीं है। बस भगवान से आपका प्रेम हो जाये एक बार तो भगवान और भक्त में कोई अंतर नही रहने वाला। रसखान के बारे में एक कथा आती है जो इस प्रकार है —

 
एक बार रसखान जी अपने उस्ताद और अनेक लोगों के साथ मक्का मदीना, हज यात्रा पर जा रहे थे। रास्ते में उनके उस्ताद ने कहा – देखो! हिन्दुओं का तीर्थ स्थल वृन्दावन आने वाला  है, वहाँ एक काला नाग रहता है। मैंने सुना है, जो ये नाग है वो वृंदावन आने वाले यात्रियों को डस लेता है। इसलिये तुम सम्भल कर चलना। इधर उधर बिलकुल मत देखना, एकदम सीधे-सीधे मेरे पीछे चलना।
इतना कहना था उस्तादजी का कि रसखान को उत्सुकता होने लगी। मानो आज कृष्ण जी उन्हें अपनी और खींचने लगे। क्योंकि भगवान कृष्ण के नाम का यही अर्थ है। जो सर्व आकर्षण है। जो सबको खींचता है। रसखान जी सोचने लगे ये वृंदावन धाम तो श्री कृष्ण जी का है, फिर यहाँ नाग लोगों को कैसे डँस सकता है?

 

ऐसा सोचते-सोचते हुए वो चले जा रहे थे कि भगवान ने अपनी लीला करनी शुरू कर दी। कृष्ण जी ने सोचा, देखूँ ये कब तक इधर- उधर देखे बिना चल सकता है। बांके बिहारीजी ने अपने मुरली की तान छेड़ी। रसखान अभी बचने की कोशिष ही कर रहे थे कि राधा रानी के पाँव की नुपुर भी बजने लगी। रसखान को अब अपने पर काबू करना मुश्किल हो रहा था। उस्तादजी की काला नाग बाली बात भी याद आ रही थी, अब वो करे तो क्या करें।
रसखान जी मन्त्र-मुग्ध हुए जा रहे है। इतने में यमुना नदी आ गया, और रसखान देखे बिना नहीं रह सके। वहाँ कृष्ण जी अपनी प्रिया श्री राधा रानी के साथ विराजमान थे। रसखान ने उनकी एक झलक देख ली। मानो आज सब कुछ भुला बैठे। श्रीजी(राधा रानी) और श्याम जी (कृष्ण) के युगल छवि के दर्शन पाकर वो मतवाले हो गए। आज भगवान के रूप माधुर्य को रसखान जी ने चख लिया। और जिन्हें भगवान के प्रेम का चस्का लग उसे और बाकि चीजों की जरुरत नही होती। रसखान जी अब ब्रज की रेत में लोट-पोट हो रहे थे , मुँह से उनके झाग निकलने लगा। भगवान उन्हें दर्शन देकर अंतर्ध्यान हो गए। यहाँ रसखान जी भगवान को ढूंढने में लग गए। सभी से चिल्ला चिल्ला कर पूछा रहे हैं। तुम्हे कहीं हमारे सँवारे सलोने को देखा? किसी ने श्याम की प्राण प्यारी राधा जी को देखा? ऐसा कहकर रसखान जी बार बार बेहोश होते जा रहे थे।

Read : राधा रानी के मुस्लिम भक्त गुलाब सखी की कहानी 

रसखान के उस्तादजी आगे निकल गए थे जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो उन्हें रसखान कहीं नज़र नहीं आया। उस्ताद जी के साथ अन्य लोग हैरान रह गए कि रसखान कहाँ रह गए। जब सभी वापस पीछे आए, और उन्होंने रसखान की दशा देखकर समझ गए कि उन्हें कालिया नाग ने डँस लिया है और अब ये हमारे किसी काम के नहीं हैं। उस्तादजी व अन्य लोग रसखान जी को वहीं छोड़कर हज पर चले गए। अब रसखान जी वृन्दावन में ही रहने लगे।
रसखान को जब होश आता तो फिर वो कृष्ण को ढूँढने लगे। रसखान जी पूछते हैं, तुमने कहीं साँवला सलोना ,जिनके हाथ में मुरली है, साथ में उनकी बेगम भी हैं ,कही देखा है? वो कौन है? कहाँ रहता है?

 

तब किसी ने वृन्दावन में श्रीबाँकेबिहारीजी के मंदिर का पता बता दिया। रसखान जी दौड़े-दौड़े मंदिर गये , लेकिन मंदिर के अंदर पुजारी ने उन्हें प्रवेश देने से रोक दिया। रसखान जी मंदिर के बाहर तीन दिनों तक भूखे -प्याशे पड़े रहे। तीसरे दिन खुद बाँकेबिहारीजी अपना प्रिय दूध-भात चाँदी के कटोरे में लेकर आए और उन्हें अपने हाथों से खिलाया।

 

इसके बाद रसखान ने भगवान के लिए ऐसे-ऐसे पद लिखे, ऐसे ऐसे भाव लिखे कि पढ़े पढ़ने वाले आश्चर्य चकित रह जाते हैं । एक मुस्लिम भक्त का भगवान के लिए इतना प्रेम। ऐसा लगता था मानो सारी लीलाएं रसखान को दिखाई दे रही हैं और रसखान उन्हें अपनी कविता के माध्यम से लोगों को दिखा रहे है।
रसखान जी कहते हैं कि सच्चा प्रेम यदि ह्रदय में उत्पन्न हो जाये तो फिर वो जाने वाला नहीं है जैसे जो बूंद समुन्द्र में मिल गई तो फिर कहाँ जाएगी।

रसखान जी कहते हैं –
प्रेम प्रेम सब कोउ कहत, प्रेम न जानत कोइ।
जो जन जानै प्रेम तो, मरै जगत क्यों रोइ॥
रसखान जी कहते हैं भगवान प्रेम के वश में हैं। प्रेम से आप जो भी उनसे करवाना चाहो वो करने को तैयार हैं।

 

रसखान में अपने एक दोहे में लिखा है – ताहि अहीर की छोहरियाँ ,छछिया भर छाछ पे नांच नचावैं
अहीर कि छोरियां भगवान श्री कृष्ण को थोड़े से छाछ पर नाचने के लिए कहती हैं। और भगवान भी उनका प्रेम देखकर थोड़ी सी छाछ पीने के लिए ठुमक ठुमक के नाच रहे हैं। धन्य है गोपियों का प्रेम।

 

एक बार एक भक्त ने रसखान जी से वृन्दावन में पूछा- अरे ओ दाढ़ी वाले बाबा। कहीं भगवान को, श्री कृष्ण को, बांके बिहारी को देखा भी है या ऐसे ही भक्त बने हो।
रसखान जी मुस्कुराये और बोले- अरे देखा है ! देखा है!

देखौ दुरौ वह कुंज कुटीर में बैठो पलोटत राधिका पायन
अर्थ : सेवाकुंज(निकुंज वन) में श्रीकृष्ण राधाजी के चरण कमल में पलोटत बैठे हुए हैं।

 

इस तरह रसखान जी ने अपना जीवन भगवान की लीलाओं को गाकर, भगवान का दर्शन पाकर गुजर दिया। रसखान जी का पूरा जीवन भगवान के लिए समर्पित था। 45 वर्ष की आयु में इन्होंने अपना शरीर छोड़ दिया।
महान कृष्ण भक्त रसखान जी जय !! भगवान श्री कृष्ण जी की जय !!

Read : कृष्ण भक्त धन्ना जाट की कहानी 

Read : बांके बिहारी श्री कृष्ण के चमत्कार की कहानियां

 

 

4 thoughts on “Krishna Muslim Bhakt Raskhan Story in hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *