Swami Ram Tirtha Story in hindi

Swami Ram Tirtha Story in hindi

स्वामी रामतीर्थ जी की कहानी

 

स्वामी रामतीर्थ जी एक आदर्श विद्यार्थी, आदर्श गणितज्ञ, समाज सुधारक, देशभक्त, दार्शनिक और प्रज्ञावान संत थे। इनके जीवन का एक एक संस्मरण हमें सत्य की ओर लेकर जाता है। ये अपने आपको बादशाह कहते थे। बादशाह रामतीर्थ। खुद को ये भले ही बादशाह कहें लेकिन लोग इन्हें पागल कहते थे। लोगों के पागल कहने पर ये अक्सर कहा करते थे कि –

 

“इन बिगड़े दिमागों में भरे अमृत के लच्छे हैं।
हमें पागल ही रहने दो, हम पागल ही अच्छे हैं।”

 

 

 

इनके जीवन से जुड़ा हुआ एक प्रसंग मिलता है। एक बार स्वामीजी ऋषिकेश गंगा जी के तट पर गए। वहाँ पर एक योगी ध्यान में बैठे हुए थे। स्वामी रामतीर्थ जी इनके पास गए और इनसे पूछा – बाबा, आप कितने वर्षों से यहाँ तप कर रहे हैं? आप कितने वर्षों से सन्यासी हैं?

योगी ने कहा – लगभग 40 साल हो गए हैं।

अब स्वामीजी ने पूछा – इन 40 सालों में आपने कुछ प्राप्त किया?

तब योगी जी ने बड़े ही गर्व से कहा – आप गंगा जी को देख रहे हैं? मैं चाहूँ तो इस गंगा जी के पानी पर उसी तरह से चल सकता हूँ जैसे लोग जमीन पर चलते हैं।

स्वामी रामतीर्थ जी ने कहा – अरे वाह महाराज! ये तो बड़ी अच्छी बात है। आप क्या चलकर वापिस भी आ सकते हैं?

योगी ने कहा – हाँ हाँ! वापिस भी आ सकता हूँ?

स्वामी रामतीर्थ जी पूछते हैं – इसके अलावा कुछ और?

योगी ने कहा – यह सिद्धि कोई कम सिद्धि है क्या?

 

 

 

अब स्वामी रामतीर्थ जी मुस्कुराये हैं और कहते हैं बाबा! यह तो बहुत छोटी सिद्धि है, बहुत छोटी बात है। आपने 40 साल इस सिद्धि को पाने में खो दिए। नदी पार करने के लिए केवल 2 आने काफी हैं। 2 आनों में आप इस तरफ जा सकते हो। 2 आनों में आप उस तरफ से इस तरफ आ सकते हो। 40 वर्षों में आपने वो प्राप्त किया जो केवल 4 आने में प्राप्त हो सकता था। आप अमृत सिंधु धर्माचरण में गए जरूर लेकिन मुक्ताफल लाने के बदले आप कंकर ही बटोर कर लाये।

 

 

 

जैसे ही उन योगी ने इन शब्दों को सुना तो दुःख हुआ कि ओह! मैंने अपने जीवन का बहुत सा समय सिद्धि पाने में खो दिया। ये मैंने ठीक नहीं किया और फिर उन्होंने लोक कल्याण के लिए जीवन बिताया।

 

 

कैसा लगा आपको ये स्वामी रामतीर्थ जी का प्रसंग? आप नीचे कमेंट जरूर कीजिये।

 

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4 thoughts on “Swami Ram Tirtha Story in hindi

  1. The meaning of ur name is possibly Krishna(Bijendra) ,as the pride of Indra/ Devraj was demolished by shri Krishna. By ur contribution in ur website, you are preaching/ good values() by such wonderful ,easy to understand and remember stories )to young Hindu boys and girls as Krishna narrated Bhagvad-gita to Arjuna and to all human beings through this Maha-purana. I hope your earnest effort will succeed in bringing-in values in next and next to next generation ………… Good good work.

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