Raghu-Vansh and Charan Paduka Story/Katha in hindi

Raghu-Vansh and Charan Paduka Story/Katha in hindi

रघु-वंश और चरण पादुका की कहानी/कथा

यहाँ पर आपको आज रघुवंश और चरण पादुका की कहानी/कथा(raghuvansh aur charan paduka ki kahani/katha) बताई जाएगी। ये कथा मानस पितृ देवो भव के अंतर्गत मोरारी बापू ने कही। आइये इन्हीं के शब्दों में हम इस कथा को जानते हैं-

Raja Raghu Story in hindi : राजा रघु की कहानी

कैसा कुल है रघवंश ? आज तक गानेवाले थके नहीं …सुनने वाले थके नहीं?

मूल तो सूर्यवंश नाम है लेकिन जब रघु आये तो सूर्य नाम हट गया और नाम हो गया रघुवंश।

पूर्व कथा है। एक बार महाराज रघु का जन्मदिन था। रघु सर्वभौम सम्राट होते हुए भी महल में नहीं रहते थे। अयोध्या के चौक में, चौराहे पर घासफूस की कुटिया डालकर अयोध्या का सम्राट निवास करता था। प्रति वर्ष उनका जन्मदिन मनाया जाता तो देवता लोग सौगात लेकर आते, स्वयं इंद्र आता था। ऋषि मुनि साधना छोड़कर आते, आचार्य चरण आते, छोटे बड़े सब आते महाराज को दीर्घायु होने की कामना देने।

उस समय की वंचित आदिवासी प्रजा, उनको हुआ हमारे राजा का जन्मदिन है.. हमारे अन्नदाता हैं, इन लोगों ने मिलकर 1 अच्छे काष्ट लकडी से पादुका बनायी थी। उसको पत्तों में लपेटकर, जंगली फूलों से सजाकर ले आये।

Charan Paduka ki katha/kahani : चरण पादुका की कथा/कहानी

गरीब दीनहीन ..वंचित. …पादुका लेकर रघु की कुटिया के पास आये। राजाधिराज सम्राट का जन्मदिन है इतना ही समादर जितना वशिष्ठ जी को मिले ..देवराज इंद्र को मिले ..इतना ही राजा रघु ने इन गरीब का सन्मान किया। अाओ बाप …सजल नयन इन गरीब जनता ने पादुका रखी।
प्रभु हम सोने का मुकुट तो नहीं दे सकते ..हीरे जडित मोजडी कहाँ से लायें? बहुत भाव से हमारे मन में जो आकार उठता था, आपके चरणों के नाप की पादुका बनायी है। ये नाचीज़ भेंट कुबूल करें। रघु ने आदिवासियों के हाथ से लेकर पादुका अपने सिर पर धारण किया। पूरा साम्राज्य स्तंभित रह गया और कथा कहती है साहब ये पादुका तबसे राज्य में केंद्र स्थान पर रही। तबसे पादुका पूजी गई। जो भी राजा बने वो रोज़ पादुका पूजन करें।

राम का वनवास हुआ और राजा दशरथ से जब आज्ञा माँग रहे हैं राम, महाराज बेहोशी की स्थिती में थे। हाथ कांप रहे थे और उसी समय सोचा – राघव तू तो कहता है मेरे पिता ने मुझे वन का राज्य दिया है, तू वन का राजा बन चुका है और हमारी परम्परा कहती है इस आदिवासी दत्त पादुका की पूजा हो। इसलिये राजा होने के नाते ये पादुका लेकर तुम वन जाओ।

चित्रकूट में जब निर्णय हुआ कि भरत 14 साल अयोध्या का राज्य संचालन करेंगे तब भगवान राम ने कहा कि अयोध्या का संचालन जो करे उसको पादुका की पूजा करनी पड़ती …तब ये पादुका भरत को दी …इसलिये जो कहते हैं ना कि पादुका आयी कहाँ से ?…लो..ऐसे आयी थी।

Read : सम्पूर्ण भरत चरित्र

Read : मोरारी बापू द्वारा मानस शंकर केदारनाथ कथा

4 thoughts on “Raghu-Vansh and Charan Paduka Story/Katha in hindi

    • aap bhajan karte ho to aapka bhajan hi aapka parmaan ban jaye… aapka vishwas or shardha hi parmaan hai..

    • Har baat ka pramaan shastro mein dhoondhne nahi jatey ….
      1 stage hota hai jab shastr prmaan dhundha jaye ….
      Fir jaise adhyatm ki yatra aagey badhti hai tab vacan praman hota hai …kisi buddhpurush ko tum suno …fir aur kahi pramaan khojne mat jao

      Aur 1 awastha aati hai jab hamara bhajan hi pramaan hota hai …hamari anubhuti kehti hai aisa hi hua hoga ….tab bhajan hi praman ban jata hai ….

      Tab kisiko safaai dene mat jao …jisko vishwas karna ho karey …na karna ho toh uski mauj …usko mubarak

      Jalan matri ka sher hai …..guju mein

      Shradhdha no ho vishay to puraava ni shi jaroor!

      Quraan ma to kyaye Payambar ni sahi nathi.

      Jaha shraddha ka vishay ho waha proof ki kya zarurat hai ?….
      Quran mein toh kahi paigambar sahab ki dastakhat nahi …..

      In the matter of faith,one should not expect proofs and documents.Prophet Mohammad has not put His signature at the end of Quran-e-Sharif,the religious book of the islam

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *