Mahabharat : Bhism Pitamah Vadh/Mrityu Complete Story in hindi

Mahabharat : Bhism Pitamah Vadh/Mrityu Complete Story in hindi 

महाभारत : भीष्म पितामह के वध/मृत्यु की सम्पूर्ण कहानी/कथा

 

महाभारत का युद्ध 18 दिन तक चला था। इस युद्ध में बहुत अधिक संख्या में सैनिक, रथी और महारथी मारे गए थे। युद्ध करते करते 9 दिन बीत गए थे। पांडवों की ओर से किसी भी पांडव का वध नहीं हुआ था। जिसे देखकर दुर्योधन भीष्म पितामह से कहता है- मुझे लगता है, आप हैं तो हमारे पक्ष में लेकिन युद्ध पांडवों के लिए कर रहे हैं। आप जैसा महारथी जिन्हे इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त है वो पांडवों को अब तक क्षति नहीं पहुंचा पाया। इस पर कहते भीष्म पितामह जी कहते हैं- दुर्योधन तुम मुझे क्रोध दिला रहे हो। भीष्म पितामह ने आज प्रतिज्ञा ले ली कि ठीक है या तो कल वासुदेव श्री कृष्ण को अस्त्र उठाना पड़ेगा या किसी एक पांडव का वध कर दूंगा

ये बात पांडवों के शिविर में पहुंची। भगवान श्री कृष्ण द्रोपदी के पास गए और कहते हैं द्रौपदी पितामह ने भीष्म प्रतिज्ञा कर ली है। वो कल एक पांडव का वध कर देंगे। अब तुम विधवा हो जाओगी।

द्रौपदी जी ये बात सुनकर हंसने लगी। द्रोपदी जी कहती है प्रभु आपकी बहन विधवा हो जाएगी इसकी चिंता आप करोगे! मैं क्यों करूँ?

अब भगवान ने कहा- कृष्णे! ठीक है। अब तुम मेरे साथ चलो। द्रौपदी भगवान श्री कृष्ण के साथ चल पड़ी। एक बार भी द्रौपदी ने ये नहीं पूछा कि कृष्ण तुम मुझे कहाँ लेकर जा रहे हो। ये है भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति।

भगवान द्रौपदी को लेकर भीष्म पितामह के शिविर की ओर जाने लगे।

द्रौपदी आगे-आगे चल रही थी और कृष्ण जी पीछे। भगवान ने द्रौपदी को कहा की आप अपनी पादुका/पदत्राण(चप्पल) उतार दीजिये क्योंकि रात्रि का समय है और ये चलते समय आवाज करेंगी। तब द्रौपदी ने अपने पैरों से पदत्राण उतारकर भगवान को दी और भगवान उन्हें अपने हाथों में लेकर चलने लगे।।

भगवान भीष्म पितामह के शिविर के बाहर पहुंचे। वहां पर सैनिक तैनात था। उसने पूछा कि तुम कौन हो?

भगवान ने जवाब दिया ये पांडवों की पटरानी द्रौपदी जी हैं।

फिर उसने भगवान से पूछा कि तुम कौन हो?

भगवान ने सोचा ये तो अच्छा हुआ, रात भी काली और हम भी काले। ये तो हमें पहचान ही नहीं पाया।
भगवान कहते हैं – मैं द्रौपदी जी का सेवक हूँ।

तब उसने पूछा तुम यहाँ क्यों आये हो?

भगवान बोले कि ये भीष्म जी का दर्शन करने के लिए आई है। सैनिक ने आज्ञा दे दी और भगवान को बाहर ही रुकने के लिए बोल दिया। उस समय सुबह होने ही वाली थी। द्रौपदी जी शिविर के अंदर गई और भीष्म पितामह जी उस समय भगवान श्री कृष्ण के ध्यान में बैठे हुए थे लेकिन आज ध्यान में कृष्ण जी नहीं आ रहे हैं। भगवान उनके मन से अपनी छवि को बाहर खींच लेते हैं। फिर भी भीष्म आँखें बंद किये हुए ध्यान करने की कोशिश कर रहे हैं।

उसी समय द्रौपदी जी ने भीष्म पितामह जी को कहा कि बाबा! प्रणाम। भीष्म पितामह के मुख से आशीर्वाद निकल पड़ा, अखंड सौभाग्यवती भव।

तभी द्रौपदी जी कहती हैं बाबा! ये आपने क्या कर दिया। आपने तो मेरे पति का वध करने की प्रतिज्ञा ली है लेकिन आपने मुझे अखंड सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद दे दिया। भीष्म पितामह जी ने तुरंत आँखें खोली और चौंक कर कहा – बेटी, तुम!

द्रौपदी जी बोली- हाँ बाबा! मैं। भीष्म जी बोले- तुम यहाँ कैसे आई बेटी?

द्रौपदी जी बोली- मुझे श्री कृष्ण लेकर आये हैं।

भीष्म जी कहते हैं- कहाँ पर हैं वासुदेव कृष्ण?

द्रौपदी कहती हैं वो बाहर बैठे हुए हैं। भीष्म पितामह जी और द्रौपदी जी तुरंत शिविर से बाहर निकले और देखा कि भगवान द्रौपदी जी की पदत्राण को अपने सिर का सिरहाना बनाकर पेड़ के साथ लेटे हुए हैं।

भीष्म पितामह जी बोलते हैं- बेटी द्रौपदी! जिस भक्त की पदत्राण भगवान अपने सिर से लगा लें उसका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता है।

इतने में पांडव भी भीष्म पितामह जी के पास आ गए। अब भीष्म कहते हैं- अर्जुन, कल जब युद्ध होगा  तब तुम शिखंडी को अपने सामने खड़ा कर लेना। मैं शिखंडी पर बाण नहीं चलाऊँगा और तुम्हें मेरा वध करने का मौका मिल जायेगा।

अगले दिन जब युद्ध हुआ तो पांडवों ने ऐसा ही किया। अर्जुन के रथ पर शिखंडी आगे आ गई। भीष्म ने स्त्री पर बाण चलाने से मना कर दिया।

तभी भगवान ने आदेश दिया कि अर्जुन भीष्म पर बाण चलाओ। अर्जुन ने भीष्म पर इतने बाण चलाये कि भीष्म की छाती बाणों से बींध दी।

भीष्म अब शर- शैय्या पर लेट जाते हैं। महाभारत युद्ध पूरा होने पर एक दिन भगवान कृष्ण सभी पांडवों को लेकर भीष्म पितामह के पास आये हैं। भीष्म का पानी पीने का मन है। अर्जुन एक बाण से धरती में छेद करके गंगा का पानी पिलाते हैं। इसके बाद भीष्म पितामह सभी पांडवों और द्रौपदी को सुंदर शिक्षा देते हैं।

अंत में भीष्म अर्जुन से पूछते हैं कि बेटा अर्जुन, वो नहीं आये?

अर्जुन पूछते हैं – कौन बाबा! वासुदेव?
भीष्म – हाँ! अर्जुन।

अरे बाबा, कृष्ण ही तो हम सबको लेकर आये हैं। अब भगवान श्री कृष्ण भीष्म पितामह के सामने आये हैं। भीष्म पितामह भगवान श्री कृष्ण की सुंदर स्तुति करते हैं जिसे नीचे दिया जा रहा है। स्तुति करने के बाद भीष्म भगवान के धाम को चले जाते हैं और अपना शरीर छोड़ देते हैं।

Read : भीष्म पितामह स्तुति

Read : श्रीमद्भगवद्गीता का ज्ञान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *