Mahabharat : Bheem kills(vadh) duryodhan Story/katha in hindi

Mahabharat : Bheem kills(vadh) duryodhan Story/katha in hindi

महाभारत : भीम द्वारा दुर्योधन वध की कहानी/कथा

युधिष्ठिर ने माता कुंती को और गांधारी ने भगवान श्री कृष्ण को श्राप दिया।

Gandhari ko Duryodhan ka vardaan :  गांधारी का दुर्योधन को वरदान

गांधारी ने दुर्योधन का कहा था कि वह नदी में स्नान करके नग्नावस्था में अपनी माता के सामने आये। जब दुर्योधन स्नान करने के बाद आ रहा था तब भगवान कृष्ण उसे रास्ते में मिले। कृष्ण कहते हैं कि अरे दुर्योधन, तुम नग्न अवस्था में माता गांधारी के सामने जाआगे। तुम लाज शर्म भूल गए हो? तुम यह भी भूल गए हो कि तुम अब बालक नहीं हो। जाओ जाओ, वैसे भी तुमने आज तक कौनसी लाज रखी है जो आज रखोगे! ऐसा कहकर कृष्ण वहाँ से चले गए।

इधर दुर्योधन ने केले के पत्ते अपनी जंघाओं से लपेट लिए। अब दुर्योधन माता गांधारी के पास जाता है। माता कहती है तुम मेरे सामने खड़े हो जाओ। दुर्योधन माता गांधारी के सामने खड़ा हो जाता है। गांधारी अपनी आँखों पर बंधी हुई पट्टी को खोलती है और उसमें से एक प्रकाश पुंज निकलता है और दुर्योधन के शरीर पर पड़ता है। गांधारी देखती है कि दुर्योधन ने केले के पत्ते लपेटे हुए हैं। माँ कहती है, दुर्योधन! मैंने तुम्हे नग्न आने के लिए कहा था लेकिन तुमने ये क्या कर दिया?

दुर्योधन कहता है माँ, मैं एकदम नग्न कैसे आ सकता था आपके सामने और मैं तो नग्न आ भी रहा था वो तो वासुदेव श्री कृष्ण मिल गए जो मुझे कहते हैं आप नग्न अवस्था में माँ के सामने कैसे जाओगे।

गांधारी सब समझ गई कि कृष्ण ने सब किया है। लेकिन अब कर भी क्या सकती थी। गांधारी कहती है दुर्योधन, तुम्हारा पूरा शरीर वज्र का हो गया है सिर्फ जिस भाग पर केले के पत्ते लपेटे हुए थे वो भाग ही कच्चा रह गया है।

दुर्योधन कहता है माँ, मैं अब ये पत्ते उतार देता हूँ।

गांधारी कहती है दुर्योधन, मैं कोई मायावी नहीं हूँ। मैंने आज अपने जीवन की पूरी तपस्या, अपना सतीत्व का पूरा फल तुम्हें दे दिया। लेकिन तुमने अपनी माँ की आज्ञा नहीं मानी। जाओ अब जाकर के युद्ध करो।

दुर्योधन कहता है माँ, युद्ध में कमर से नीचे तो प्रहार वैसे भी नहीं करते हैं। आप चिंता ना करो। ऐसा कहकर दुर्योधन एक सरोवर में जाकर छिप जाता है।

 

सुबह होती है। सभी पांडव और कृष्ण युद्ध के लिए युद्ध के मैदान में पहुँचते हैं। लेकिन वहाँ दुर्योधन नहीं था। पता चला कि दुर्योधन एक सरोवर में छिपकर बैठा हुआ है। सभी उस सरोवर पर पहुँचते हैं और दुर्योधन को कहते हैं तुम इस सरोवर में क्यों छिपे हो?

दुर्योधन कहता है कि मैं छिपकर नहीं बैठा हूँ। मेरा पूरा तन बदन आग में जल रहा है। भीष्म पितामह के घायल होने की, गुरु द्रोण के वध होने की, मेरे 99 भाइयों के मौत की और मित्र राधेय कर्ण का अंतिम संस्कार करने की अग्नि में जल रहा है। वरना मैं तुम सबसे छिपकर क्यों बैठूंगा इस सरोवर में। कायर तो तुम लोग हो जो छल से सभी को युद्ध में मार देते हो। ऐसा कहकर दुर्योधन बाहर आ गया।

 

दुर्योधन कहता है तुम सभी मिलकर मुझसे एक साथ युद्ध करोगे कि एक एक करके युद्ध करोगे। तब युधिष्ठिर कहते हैं मैं तुम्हें वचन देता हूँ कि तुम हम पाँचों में से किसी एक को चुन लो और अपना एक अस्त्र चुन लो। अगर तुमने उसे युद्ध में हरा दिया तो हम अपनी हार स्वीकार कर लेंगे। तब कृष्ण युधिष्ठिर जी से जाकर कहते हैं कि वचन देने से पहले एक बार विचार तो करना चाहिए आपको। आप और महादेव बिना सोचे समझे वचन दे देते हो और फिर बाद में उस वचन को पूरा करने के लिए क्या क्या नहीं करना पड़ता है।

 

अब दुर्योधन कहता हैं मैं भीम के साथ गदा युद्ध करूँगा। तब युधिष्ठिर सहदेव को कौरव शिविर में भेजकर दुर्योधन की गदा और वस्त्र मंगवाते हैं। सहदेव लेकर के आता है और भीम व दुर्योधन युद्ध के लिए तैयार हो जाते हैं। इसी समय इन दोनों के गुरु और श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी वहाँ पर आ जाते हैं।

Bhim Duryodhana Gada yudha : भीम दुर्योधन गदा युद्ध

भीम और दुर्योधन अपने गुरु बलराम जी को प्रणाम करते हैं और गदा युद्ध शुरू हो जाता है।

भीम दुर्योधन पर वार करता है लेकिन दुर्योधन पर कोई असर नहीं होता है क्योंकि माता गांधारी के आशीर्वाद से दुर्योधन का शरीर पूरा वज्र का हो गया था। दुर्योधन बार बार हँसता है। दुर्योधन भीम को मार मार के उसकी नस नस ढीली कर देता है। तब भीम कृष्ण की ओर देखते हैं। कृष्ण भीम को उसकी प्रतिज्ञा याद दिलवाता है।

भीम ने द्युत क्रीड़ा में भरी सभा में प्रतिज्ञा की थी कि जिस जंघा पर उसने द्रौपदी को बैठने के लिए कहा है उसी जंघा को वो एक दिन तोड़ देगा। अपनी प्रतिद्या के अनुसार आज भीम दुर्योधन की जंघा पर वार करता है और उसे मार मार कर तोड़ देता है। दुर्योधन मरणासन्न अवस्था में पहुँच जाता है।

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भीम के इस कृत्य पर बलराम जी को गुस्सा आता है और वो इतने क्रोधित हो जाते हैं कि भीम को मारने का प्रयास करते हैं। तब कृष्ण उन्हें प्यार से समझाते हैं कि जब धर्म युद्ध में आपकी आवश्यकता थी तब आप तीर्थ यात्रा पर चले जाते हैं। आपको ये ज्ञात होगा कि इस दुर्योधन के छल, कपट से कैसे राज पाठ छिन लिया। अगर आपने प्रतिज्ञा की होती तो क्या आप दुर्योधन को नहीं मारते? ऐसा कहकर कृष्ण ने शांत करवा दिया बलराम को।

अब पांडव खेमे में ख़ुशी का माहौल था जबकि सूर्यास्त होने पर अश्व्थामा, कृतवर्मा, कृपाचार्य ये तीनों दुर्योधन के पास आते हैं जो अब मरने ही वाला है। इस तरह से गदा युद्ध में भीम की विजय और दुर्योधन की पराजय हुई।

 

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