Buddha Purnima : Gautam Buddha inspirational Story in hindi

Buddha Purnima : Gautam Buddha inspirational Story in hindi

बुद्ध पूर्णिमा : भगवान गौतम बुद्ध की प्रेरणादायक कहानी/कथा

महात्मा बुद्ध(Mahatma Buddha) के जन्म दिन को बुद्ध पूर्णिमा(Buddha Purnima) के रूप में मनाया जाता है। इसे बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती भी कहते हैं। आपके सामने गौतम बुद्ध(Gautam Buddha) की एक छोटी सी और प्रेरणादायक कहानी है।

काशी में महात्मा बुद्ध(Mahatma Buddha) किसी गृहस्थी के द्वार पर भिक्षा मांगने गए। भगवान बुद्ध(Bhagwan Buddha) उस गृहस्थी के द्वार पर बड़ी देर खड़े रहे। वो अंदर से आया उसने कहा कि क्या बात है? कैसे खड़े हो?

तो गौतम बुद्ध(Gautam Buddha) ने कहा कि मैं भिक्षा मांगने निकला हूँ। आपके पास यदि कुछ देने को हो तो कृपा करके मुझे प्रदान करें।

ये सुनकर उस व्यक्ति ने कहा कि अभी हमारे घर में आज खीर बनी है। तुम मुझको बड़े अच्छे महात्मा लगते हो तो 2 मिनट और रुकिए मैं अभी खीर लेकर आता हूँ, आपके पात्र में डाल देता हूँ।

जब ये सुना तो बुद्ध(Buddha) ने कहा है कि मैं इतना देर रुका हूँ तो थोड़ी देर और सही… ले आओ।

वो व्यक्ति अंदर गया और खीर लेकर आया। लेकिन उसने खीर डाली नहीं। उसने कहा कि पहले तुम मेरे एक प्रश्न का जवाब दो।

बुद्ध(Buddha) जी बोले कि पूछो…

उसने कहा कि मुझे ईश्वर प्रेम चाहिए। ईश्वर प्रेम कैसे मिलेगा? मैं बड़े बड़े संतों के पास गया, मैंने बड़े बड़े ग्रन्थ पढ़े, किताबें पढ़ी, लेकिन मेरे अंदर भगवत्प्रेम नहीं जागा… तो बताइये कि मेरे ह्रदय में ईश्वर प्रेम कैसे जागेगा?

बुद्ध(Buddh) ने कहा कि तुमने सवाल तो बड़ा मुश्किल पूछ लिया है मैं तुमको जवाब भी दूंगा…. पर पहले तुम जो लाये हो मुझे कृपा करके दे दो। ये खीर हाथ में लिए खड़े हो… पहले तुम मुझे जो देने के लिए लाये हो वो प्रदान कर दो। फिर मैं आराम से बैठकर जवाब दे दूंगा.. जल्दी क्या है?

तो उसने… पात्र में खीर लाया था.. उसने बुद्ध को कहा कि मैं आपको खीर दे तो दूँ पर लोगे किसमें? खीर लेने के लिए कुछ है तुम्हारे पास? हाथों में तो खीर डालूँगा नहीं!

तो बुद्ध(Buddha) ने अपनी झोली से पात्र निकाला और कहा कि मैं लाया हूँ साथ में… इसमें डाल दो।

जब वो खीर डालने लगा तो उसने देखा कि वो पात्र तो बड़ा मैला था। उसमें दुनिया भर की धूल मिट्टी लगी हुई थी। लगता था वो कई दिनों से धुला ही नहीं है…. बड़ा गन्दा था…. जब वो डालने लगा तो उसके हाथ रुक गए।
उसने कहा कि महात्मा जी, मैं उसमें खीर तो डाल दूँगा लेकिन मेरा डालना बेकार हो जायेगा क्योंकि आपका ये पात्र इतना गन्दा है। आप खीर ले तो लोगे लेकिन खा नहीं पाओगे… इतनी मिट्टी… इतनी धूल इसमें.. तो मेरा डालना बेकार हो जायेगा… आप पहले इस पात्र को स्वच्छ करिये, धोकर लाइए, फिर मैं आपको खीर दे दूँगा।

 

तो महात्मा बुद्ध(Mahatma Buddha) ने हंसकर कहा कि भैया…. बस यही तेरे प्रश्न का भी जवाब है। तूने पूछा कि ईश्वर प्रेम कैसे मिले… तो सुन ले… अभी तेरे मन का जो पात्र है… वो बड़ा मैला है। पहले सत्संग करके… नामजप करके अपने पात्र को साफ़ बना ले…. तो अपने आप भगवत्प्रेम तेरे अंदर प्रकट हो जायेगा।

महापुरुष ऐसे ही कठिन बात को सरल करके हमें समझा देते हैं। बुद्ध ने कहा कि जैसे मेरे मैले पात्र में ये खीर व्यर्थ हो जाएगी.. ऐसे ही तुझे मैं यदि भगवत उपदेश भी दूँ तो वो उपदेश बेकार हो जायेगा क्योंकि तेरा पात्र ही मैला है। पहले भजन कर.. प्रभु का नाम गा और अपने पात्र को स्वच्छ बना.. अपने पात्र को साफ़ कर…. अपने आप तुझे भगवत्प्रेम तुझे प्राप्त हो जायेगा.. तुझे ज्यादा प्रयास नहीं करना पड़ेगा।

बोलो.. बुद्ध भगवान(Buddha Bhagwan) की जय!!

((शब्द : श्री गौरव कृष्ण गोस्वामीजी , भागवत कथा – सिरसा))

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