Baba Farid Story in hindi

Baba Farid Story in hindi

बाबा फरीद की कहानी/कथा

 

ये बाबा फरीद(Baba Farid) का जो मैं स्मरण करता हूँ। रोज़ा के दिन चल रहे हैं …रमजान चल रहे हैं इस्लाम धर्म के। फरीद साहब के जीवन का 1 प्रसंग है छोटा सा।

रोज़ा चल रहा था फरीद साहब का और जलालुद्दिन सूफी संत मिलने आये। फरीद बैठे थे …उपवास है ..रोज़ा है …रमजान का महीना है …तो उस महापुरूष के पास 1 अनार था …वो फरीद को दे दिया। बिना बोले चल पड़े।

वो अनार हाथ से गिरा …उसका ऊपर का छिलका थोड़ा टूटा हुआ था …उसमें से 1 दाना गिर गया।

फरीद साहब ने सोचा कि जब इफतार का समय आयेगा शाम को …जब खाने की इजाज़त इस्लाम धर्म ने दी हो …तब मैं ये दाना खाऊँगा और अनार का ये दाना वो इफतार के समय खाते हैं और सूफीवाद सभी कहते हैं कि इस एक दाने से फरीद की चेतना विलसित हो गई थी …अद्भूत जाग्रण हो गया।

अब आदमी की स्थिती क्या है कि करूणा को enjoy नहीं करता है। कम करूणा क्यूँ हुई उसकी शिकायत करता है और फरीद के मन में 1 शिकायत उठी कि 1 ही दाना क्यूँ मिला अनार का ? अनार में तो बहुत दाने थे।

 

फरीद साहब स्वयं कहते हैं कि अध्यात्म मार्ग कठिन से कठिन मार्ग है। खुद उसके जीवन में शिकायत उठी है कि 1 ही दाना क्यूँ गिरा?

और उसी समय 1 दूसरा सूफी संत आता है …कुतुबुद्दीन आये।

वो आये और फरीद को शिकायत के कारण ग्लानि में डूबे देखकर …….अरे …पवित्र मास चल रहा है …बंदगी का मास चल रहा है रमजान और बाबा फरीद आप ऐसे ग्लानि से क्यूँ भरे हैं ?…कुछ तो कहें।

तब बोले – 1 दाना मिला …1 दाने से इतनी जागृती मिली तो सब दाने मिल जाते तो?

वो महात्मा ऐसा कहते कहते चल दिया …..जो करूणा थी ना ….वो 1 ही दाने में थी ….बाकी पूरा अनार बेकार था।

 

मेरे भाई बहन …कृपा का 1 अंश भी पर्याप्त है …कृपा कम ज़्यादा हो ही नहीं सकती …कृपा का कोई गणित नहीं ….कृपा का कोई सांख्यशास्त्र नहीं है ….होती है तब पूरी ही होती है।

 

मेरी …मेरे श्रोताओं से प्रार्थना है …भक्ति मार्ग हो …प्रेम मार्ग हो …अध्यात्म मार्ग हो ….चित्त शिकायत शून्य होना चाहिये ….शिकायत करने के लिये संसार बहुत बड़ा है …थक जाओगे तुम भी… सुनने वाले भी थक जायेंगे।

 

इसको अध्यात्म में ना लायें …please …कुछ क्षेत्रों को अनछुआ रखो …हमारी शिकायतें गुरुओं के पास भी होती हैं …सिद्धांतों के बारे में होती हैं …रहस्यों के बारे में होती हैं …..शिकायत …शिकायत …शिकायत …शिकायत।

 

मैं तो इसी निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ ….अध्यात्मवादी ज़्यादा शिकायत करे …तो ये हिंसा कर रहा है …शिकायत हिंसा है।
संसार में क्षम्य है …कि रोटी ठीक नहीं बनी …तुमने मेरे साथ ठीक बात नहीं की …मैं 3 बार मुस्कुराया तू 1 बार भी मुस्कुरायी नहीं। लेकिन अध्यात्म में नहीं ….

 

मुरारी बापू के शब्द(फरीदाबाद,हरियाणा)
मानस युगधर्म
जय सियाराम

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