Morari Bapu all Quotes Thoughts in hindi

Morari Bapu Quotes

Morari Bapu Quotes : मोरारी बापू के सर्वश्रेष्ठ विचार

यहाँ पर मोरारी बापू के कुछ सर्वश्रेठ विचार(morari bapu ke sarvashreshth vichar) दिए जा रहे हैं। जिन्हें पढ़कर आपको लगेगा कि बापू खुद ही बोल रहे हैं। ये विचार मोरारी बापू द्वारा मानस-श्रीदेवी(Manas- SRIDEVI) राम कथा, विंध्याचल, 21 सितंबर 2017 से 29 सितंबर 2017 कथा के हैं।

 

1. मुझे स्मरण है कि कुछ सालों पहले डगमगपुर में कथा थी। उसी कथा में इस कथा का बीज …माँ की कृपा से बोया गया था। मैं दर्शन के लिये भी उसी समय यहाँ आया था और मेरे मन में भी था कि माँ के चरणों में 1 बार बैठकर इस करुणा मूर्ती माँ की गोद में बैठकर आखिर व्यास्पीठ क्या है ?
शक्तिपीठ तो है।
व्यास की विशाल शक्ति की ये पीठ है। व्यास माने व्यापक …उदार …. माँ के चरण में बैठकर गायन हो …ये मेरा भी मनोरथ था।

 

2. हम कितने ही विषयी क्यूँ ना हो …9 दिन के लिये यहाँ साधक बनकर बैठें। सिद्ध हमें होना नहीं है क्यूँकी सिद्ध होने में बहुत ऐसी …ऐसी साधना करनी पड़ती है कि वो बड़ा भयानक है ..ये साधना का रूप ….
सिद्ध हमें होना नहीं है और माँ हमें विषयी से ऊपर उठा और मध्य में …कि जैसे कहा गया ना एक ओर भोलेनाथ ..बाबा विश्वनाथ बैठा है …और एक ओर तीर्थ राज प्रयाग …और बीच में माँ विराजमान।
उभय बीच श्री सोहई कैसी। ब्रह्म जीव बिच माया जैसी।।

 

3. साधक वो है जो साधना करता हो।
मेरा अर्थ तो बहुत सीधा सादा है। मैं उसी को साधक मानता हूँ जो किसी के जीवन में बाधक ना बने …वो साधक।

 

4. साधना …. शक्ति के बिना नहीं हो सकती …शांति के बिना नहीं हो सकती और भक्ति के बिना नहीं हो सकती। आप लाख साधना करो आपके मन में ये भाव ना हो …भक्ति ना हो ..तो आप साधना में केवल 1 क्रिया मात्र कर रहे हो और शांति ..भक्ति..शक्ति …ये माँ के ही तो रूप हैं।
रामचरित मानस में वाल्मिकी ने तो कहा कि सीता का चरित्र ही महत्त है …राम चरित मानस में सीता का जो रूप प्रस्तुत किया गया है, कभी वो भक्ति के रूप में प्रस्तुत किया, कभी माया के रूप में प्रस्तुत कर दिया …कभी …शंकराचार्य की बोली में कहूँ तो सीता को शांति के रूप में प्रस्तुत किया गया।

 

5. माँ की करुणा क्रम में नहीं होती है।
गणित के मुताबिक माँ करुणा नहीं करती। वो तो अगणित ही होती है। इसलिये चौपाईयाँ जो चुनी गई …उसमें क्रम नहीं है।

 

6. मैं तो कोई भी आदमी में ….भले सेवक हो, भारत का हो, विदेश का हो, जिसमें 24 घंटे …बोलना … चलना…बैठना ..उठना ..खाना …पीना …सब में विवेक की प्रधानता हो तो मेरी व्यास्पीठ को उसको विप्र कहने में कोई तकलीफ नहीं।
विवेक जागृत हुआ वो धीरे धीरे बुद्धपुरूष बन जाता है। ऐसा बुद्धत्व जिसने प्राप्त किया है उसके चरणों की पूजा सबसे बड़ा पुण्य है।

 

7. अहंकार शून्य साधक क्या नहीं कर सकता!
साधना कितनी ही प्रबल है लेकिन साथ साथ अहंकार है तो कुछ नहीं कर सकता। सभी ऊर्जा खुद पर आती है और आदमी को विकृत कर देती है। भीषण बना देती है। उसका दर्शनीय पना खतम हो जाता है। उसके शरीर की श्री जो होती है …खतम हो जाती है साहब।

 

8. मेरे गुरू ने तो कहा कि ये राम चरित मानस ही कालिका है इसलिये मैं उसका पृष्ठ भी काला ही रखता हूँ। ये कालिका है …..
इसकी कृपा है तो तोतली भाषा बोलने लगे।

 

9. मेरे भाई बहन – दुनिया में आत्मबल से भी ऊँचा है ..भजन बल।
विश्व का कोई श्रेष्ठ बल हो तो तलगाजरडी दृष्टि से है ..भजन बल।
कुछ ज़्यादा सीखने की ज़रूरत नहीं है …जो थोड़ा सीख गये हो …भूल जाओ ….और राम नाम याद कर लो ….इतनी ही ज़रूरत है। हम ज़्यादा सीख गये हैं. ..खाली रहो …और हरि नाम ….प्रभु का नाम।

 

10. एक प्रश्न पूछा है बापू आप कहते थे fathers day ..mothers day ..वो ठीक है ..आप ये भी तो बताओ ब्राह्मण का day कौन ?
बापू बोले – यज्ञोपवित change करने का दिन वो ब्राह्मण का day है। क्षत्रियों का day दशहरा है। वैश्यों का day है लक्ष्मी पूजा ..और सेवक गण जो हैं….ये होलिका का उत्सव ये उसीका day है। सबके दिन हैं। भारतीय दिन मनाओ।ये पाश्चात्य दिन छोडो।
बापू wife का day ??…..
बापू बोले ..कौन day …360 दिन उसीके होते हैं।

 

11. आप मेरे साथ सहमत हो ऐसा मैं नहीं कहता। आप मुझे केवल सुनें और फिर आपकी अनुभूती क्या है ..आपकी अंत: करणीय प्रवृत्ती आपको किस रूप में इन बातों को कुबूल करना …नहीं करना ..जो राय दे …उसके मुताबिक चलना। मैं जो कहूँ वो अंतिम नहीं है …please ..इति नहीं है …ये केवल विचार प्रस्तुत है मेरे …गुरू की कृपा से …अनुभव से।

 

12. साधना भी देखा देखी मत करो।
आपको तप करना है तो आपको सभी इन्द्रियों को काबू में रखना होगा …दृष्टि को काबू में रखना होगा …ऐसे आसन करना होगा ..जो जो तप के नियम।
लेकिन आप जप करो तो तुम्हें कोई नियम की ज़रूरत नहीं …आँखें कसके जोर से बंद करने की ज़रूरत नहीं ..ऐसे light mode में आँखें बंद करो ..जैसे बैठना हो बैठो …जप में छूट है …यद्यपि कुछ विशिष्ट मंत्र के जप में ये छूट नहीं है …..
लेकिन हरि नाम का जप…जियो ..जितना सरल होकर ।

 

13. कोई मंत्र ..तंत्र कुछ भी ना आये …चिंता मत करो। केवल बोलो …माँ. ..माँ. ..माँ. ..माँ. ..पर्याप्त है …… महामंत्र है माँ।

 

14. मुझे आज 1 प्रश्न पूछा कि त्रेतायुग में राम गुजरात गये थे ?
तब गुजरात …महाराष्ट्र ..कुछ नहीं था …केवल पृथ्वी थी ..केवल भारत वर्ष था …केवल अखंड विश्व था …और इस पृथ्वी के मालिक परमात्मा राम थे।
लेकिन इतनी तो कद्र करो कि त्रेतायुग में राम भले गुजरात में ना गये हों लेकिन गुजरात ने राम कथाकार तो कितने दे दिये हैं इसकी तो इज्जत करो, कोई कम नहीं दिये हैं।

 

बापू के शब्द 
मानस श्रीदेवी
जय सियाराम

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