Morari Bapu Quotes and Thoughts in hindi Part 3

Morari Bapu Quotes and Thoughts in hindi : Part 3

मोरारी बापू के सर्वश्रेठ विचार और वाक्य : पार्ट 3 

 

मोरारी बापू द्वारा 797वीं राम कथा मानस पितृ देवो भव सापूतारा गुजरात में 9 सितम्बर 2017 से 17 सितम्बर 2017 तक(09.09.2017 –17.09.2017) की गई। इसमें से मोरारी बापू के सर्वश्रेठ विचार और वाक्य(Morari Bapu ke Sarvashreshth Vichar or Vakya) लिखे गए हैं । आप इन्हे पढ़ेंगे तो आपको ऐसे लगेगा कि जैसे बापू ही बोल रहे हैं।

 

1. मेरा 1 सूत्र याद रखना युवान भाई बहन …जो पहला विचार आता है ..वो तुम्हारा नहीं, परमात्मा का है। उसकी इज्जत करो …उसका स्वीकार करो। उसके बाद जो विचार आते हैं वो हमारे मन का खेल है।
जो सब में हरि को ना देख पाये …य़े भाव ना हो ..वो सब सोये हैं …जागृत नहीं हैं …

2. कृपा..कृपा है।
करूणा ..करूणा है।
जब उसपर शंका शुरू हो गई तो हम कहीं के नहीं रहेंगे बाप।

3. साधु का क्षण और अन्न का कण कभी मत बिगाड़ो।

4. युवान भाई बहन, पिता के कदमों पर चलो। माँ के आगे चलो …ऐसी तरक्की करो कि मेरी माँ पीछे है ना और आचार्य के साथ साथ चलो।

5. बाप लायक ना भी हो ..फिर भी …हमको पितृ भाव रखना चाहिये ..सावधानी से।

6. आँख कृपा है। आँसूं करुणा है। कईयों के पास आँख है …कृपा है …..लेकिन करुणा के आँसूं नहीं हैं।

7. कृपा माँगो तब मिले …विनय करना पड़ता है।
करुणा माँगी नहीं जाती….करुणा सामनेवाला किये जाता है। तुम माँगो ..ना माँगो ..करुणा होती रहती है।
कृपा कुँए की सिंचाई है। करुणा नभ की बारिश है।
कृपा handpump है …करुणा tubewell है …फव्वारे निकलते रहते हैं।

 

8. सूरज उदित हुआ होगा तब भी जो सोया होगा ….समझ लो वो रात को बहुत रोया होगा।

9. मुझे सुनते हो तो अब थोड़ा थोड़ा इस मार्गी के कदम पर चलो।

10. किसीने स्वामी शरणनंदजी से पूछा कि स्वामीजी सुख और आनंद में क्या अंतर है ?
स्वामीजी बोले कि सुख …दुख को दबा देता है।
आनंद …दुख को मिटा देता है।

11. कथा में अाओ तो सजधज के अाओ …मैं कोई पुराने विचार वाला आदमी हूँ ही नहीं….पुराने विचार तो मैने दफना दिये हैं सब समुंदर में।
मेरे श्रोता सुंदर हों लेकिन भारतीय परम्परा में हो …ये भी ध्यान रखें। मैने कभी कहा है कि इतने गहने पहनकर कथा में आये हो …जाओ ???…..नहीं. .नहीं. .नहीं. ..तुम आनंदित रहो लेकिन भूमिका बनाओगे तो और ज़्यादा पचा पाओगे।

12. बाप ….व्यसन छूट जाये तो बहुत अच्छी बात है लेकिन मैं दबाव नहीं डालता किसी पर …मेरा प्रयास है ..विनय से ..कि तुम्हें कथा का व्यसन हो जाये …तो दूसरे व्यसन अपने आप छूट जायें। किसीके कहने पर किसने छोड़ा है ?

13. अध्यात्म यात्रा का पहला सूत्र है …निर्भयता। ना किसीके धन से डरना ….ना किसीकी सत्ता से डरना …ना खुद के शरीर से डरना। जो निर्भय नहीं. ..वो अध्यात्म मार्ग का मार्गी है ही नहीं।

14. कर्म हम सबका पीछा कर रहा है। हम और आप कोई बचे नहीं कर्म से। गीताकार कहते हैं कि 1 क्षण भी आदमी कर्म किये बिना रह नहीं सकता ….कर्म बलवान है।
याद रखना सूत्र के रूप में …कर्म है पिता ….कृपा है माता। कर्म पीछा करता है …कृपा दुलार करती है। कर्म भगाता है …कृपा गोद में लेती है। ये अध्यात्म माता पिता हैं। कृपा को मेरी व्यास्पीठ माँ कहती है…कर्म को तुलसीदासजी वाली कहते है ….मानी पिता ..पितृ चरण।

15. डांटना आता ही नहीं….क्या करूँ ? कभी किसीको थोड़ा कह भी दूँ …तो फिर कहीं चैन नहीं पड़ता कि बावा तू क्यूँ बोला? क्या ज़रूरत थी ये बोलने की ? क्या करूँ स्वभाव की पराधीनता है और मुझे आपको कोई सिद्धांत नहीं देना है। आप में पड़े स्वभाव को तलगाजरडा यदि खोल पाये तो मैं कृतकृत्य …मेरा कोई mission नहीं है …कथा आपको भी सुननी चाहिये …वरना समय चला जायेगा।

16. हरि स्मरण ..हरि स्मृति जिसकी बनी रहेगी …वो कर्म के मुकाबले में भी भय से मुक्त हो जायेगा । जीव हैं. ..आदमी कमजोर है …इन्द्रियाँ प्रबल हैं. ..इन्द्रियाँ इतनी बलवान हैं जो समझदार आदमी को भी आकर्षित कर दें। इसलिये आदमी को हरि स्मरण रहे । हरि स्मरण का जिसको आधार होगा …पतन की बेला आते-आते …हरि उसको बचा लेता है।

 

17. ये इंद्र क्या है ?
जो इन्द्रियों के गुलाम हैं। वो सब समाज के इंद्र हैं।इंद्र ऊपर नहीं रहता। जो इन्द्रियों के नौकर बन चुके हैं….वोही कारण हैं समाज की अहल्याओं को छलने का।

18. मेरे युवान भाई बहन जीवन में संघर्ष तो करना पड़ेगा। कर्म के साथ लड़ना पड़ेगा। लेकिन हिम्मत तो तब रहेगी जब मुड़ ..मुड़कर हरि का स्मरण करते रहो कि मेरे हरि मेरे पीछे हैं। स्मृति बनी रहे तो संघर्ष में हम पार उतरेंगे।

19. वाली अपने बेटे अंगद का हाथ भगवान राम के हाथ में देता है। मेरे बेटे को आप दास के रूप में कुबूल करो कुमार दान किया है।
सच्चा वाली कौन ?
जो अपने संतान का हाथ सत् के हाथ में सुपृत करे। सच्चा वाली वो है जो अपनी संतान को प्रेम के हाथ में समर्पित करे …करुणा के हाथ में दे ।

 

20. भगवान ने वाली को दिल में बाण मारा था और हृदय में प्रेम रहता है और आज वो प्रेम प्रगट हुआ है। दिल में दबा प्रेम या तो परमात्मा के बाण से प्रगट होता है …या किसी बुद्धपुरूष की बाणी से प्रगट होता है।

21. मैं जितनी कथा कर पाया शुरू से आज तक और करता रहूँगा जब तक परमात्मा करवायेंगे लेकिन इनमें जो भूमिका में 2…2 पंक्तियाँ लेता हूँ ना …ये प्रत्येक कथा की 2…2 पंक्ति मेरे श्रोता याद कर ले ना …बेड़ा पार हो जाये। उसको पूरा राम चरित मानस का पारायण करने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी..मैं व्यास्पीठ से बोल रहा हूँ ….मेरी ज़िम्मेदारी समझ रहा हूँ।
मैं आपको कंठी नहीं देता हूँ। कंठ में राम चरित मानस की चौपाइयाँ दे रहा हूँ। ये आपको कंठस्थ हो जायें …कंठी नहीं है मेरे पास ….कंठ में पंक्तियाँ दे रहा हूँ।
कंठी तो बाहर डाली जाती है ..चौपाईयाँ तुम्हारे भीतर डाली जा रही हैं।
आप माला फेरते हो तो किसीने भी माला ऐसे ऐसे (बाहर की तरफ) फेरी है ? मणका विपरीत दिशा में नहीं फेरा जाता ….ऐसे ऐसे (अंदर की तरफ)।
उसका मतलब तुम अंदर ले जाओ
ऐसे ऐसे (बाहर की ओर)….फेरना बमन है …..
ऐसे(अंदर की ओर )…फेरना सिमरन है।

 

22. शीलवान वो है जो देखे सबको …लेकिन आँखों में वासना ना हो …उपासना हो। आँखें फोड नहीं डालनी ….परमात्मा ने दी है। सबको देखो ….पर वासना ना हो ..उपासना हो।

23. बच्चा बोला देखकर …मस्जिद आलीशान….
अल्लाह तेरे एक को …. इतना बड़ा मकान ??
—-निदा फाज़ली साहब

 

24. 9 दिवसीय राम कथा जो पूर्णता को प्राप्त कर रही है। उसका सुकृत फल आईये हम….आप…इतने देशों में सुनी जा रही थी …जहाँ बैठे हों श्रोतागण…और दुनिया में कहीं भी ….किसीके भी …….आईये हम सब मिलकर के इस कथा का फल दुनिया के समस्त पितृओं को समर्पित कर दें। ये सबसे बड़ा पितृ तर्पण…. आपके चरणों में हम ये कथा समर्पित करते हैं।

बापू के शब्द 
मानस मातृ देवो भव 
जय सियाराम

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