Morari Bapu all Quotes Thoughts in hindi

Morari Bapu Quotes and Thoughts part 6


19. वक्ताओं के लक्षण में ….भागवत के महातम्य में लिखा गया है कि वक्ताओं के कुछ लक्षण हैं ..उसमें वक्ता ऐसा हो जो वेद शास्त्रों को बार बार संशोधित करे।

 

20. शादी करके फिर पहली बार स्मशान में प्रणाम करना ….मेरा बस चले तो शादी के गठबंधन को छुड़ा ने की रस्म मैं वहाँ करवाऊँ।
तलाख से बच जाओगे ….मेरे महादेव का जो दांपत्य है ….वो आशिर्वाद देगा।
21. कभी मानस का मास पारायण करने की इच्छा हो …तो स्मशान में करना …शांति से …
और जब तुम मास पारायण का पाठ स्मशान में करते हो …उसी समय किसी की death हो गई …और body आयी …तो पाठ तुम करते हो …फल उसको मिलेगा ….सीधी direct flight हो जायेगी उसकी।

 

22. परमात्मा रिश्ता हमारे साथ जोड़े ….ऐसी स्वतंत्रता यदि हम …शरणागत होकर दे देंगे ….तो ये संबंध …बंधन नहीं होगा ………..वरना हर संबंध बंधन है।

 

23. भजन का rehearsal नहीं होता …भजन फूटता है …
भजन को …बंदगी को …किसी अवस्था से लेना देना नहीं…किसी भूमि से भी लेना देना नहीं …..
भक्ति जनम जनम में उतरती है …कब प्रगट हो जाये …खबर नहीं।
24. मृत्यु के लिये भूमि इतनी महत्त्व की नहीं है …जितनी भूमिका महत्त्व की है।
सवाल है अवस्था का ….साधक का हृदय जब काशी बन जायेगा।
हमारा मानस हमारा हृदय है …वो जब मसान बन जायेगा तब मुक्ति मुट्ठी में है ……..ना स्थालांतर की ज़रूरत …ना कालांतर की ज़रूरत …ना देशांतर की ज़रूरत ….केवल भावांतर।

 

25. तुम सच्चे हो तो please जवाब मत देना। ज़्यादा जवाब वो देता है जो थोड़ा झूठा हो सकता है।कोई सफाई देनेकी ज़रूरत नहीं …तुम्हारा सत्य तुम्हें ऊँचा ले जायेगा।
सत्य को इतना कमजोर मत समझो कि इतने support के बाद सत्य टिका रहे …नको। उसको support की ज़रूरत नहीं है। ये सीधी बात है। support कमजोर लोगों के लिये ही होता है। हम और आप कब लकडी लेते हैं?
जब हम कमजोर हो जाते हैं । हम और आप सीढीयाँ उतरते हैं तब किसीका कंधा क्यूँ पकड़ते हैं ?…क्यूँकी थोडी कमजोरी आ गई ..कि कहीं गिर ना जायें।
इसलिये अपनी प्रामाणिकता …अपनी पवित्रता …अपना सत्य …अपनी करुणा के लिये भी जिसको support चाहिये …तो समझना बच्चा कमजोर है।

 

26. व्यास्पीठ पर बैठना …बोलना …ये चिता पर बैठकर बोलना ही है …..ये और क्या है ?….चिता है…
देखो हम सब सफेद और काला रखते हैं (व्यास्पीठ पर )।
मसान का रंग काला होता है …चिता की भस्म सफेद होती है। ये black and white है सब।

 
27. गांधीजी ने 1 छोटी सी पुस्तिका लिखी ..पढ़ने जैसी है …राम नाम के बारे में।
गांधीजी को पूछा ..आपकी पूर्ण निष्ठा कहाँ है ? अहिंसा ?…सत्य ?
गांधी ने कहा- वो तो है ही ..अहिंसा और सत्य ये track पर मैं जा रहा हूँ ..ये तो सवाल ही नहीं। मुझे मूर्तियों में आस्था नहीं है लेकिन जो मूर्ती पूजा करते हैं उसकी मैं निंदा नहीं करता। लेकिन मेरे मूल को मजबूत रखने के लिये अगर बल मुझे कोई देता है तो और सभी सहारे छोड़कर …केवल राम नाम मुझे ये बल देता है।

 

 

28. भय इतना ही होता है भजन में …ध्यान दो –
1 शरणागती हो जाये …फिर डरना क्या?
लेकिन 1 ही भय होता है भजनानंदी को ….कि मेरे कारण मेरे इष्ट को कभी भी कोई मुश्किल पैदा ना हो जाये।
हम जिससे प्रीत करते हैं उसका बहुत ध्यान रखते हैं ….1 ही भय होता है …मेरे ठाकुर को कुछ ना हो।

 

29. राम चरित मानस
राम है ….सत्य।
चरित है …..प्रेम।
मानस है …..करुणा।

 
30. जीवन….. सुख है …….
मृत्यु…… सुख का सार है।

मैं मौन का पक्षधर हूँ। सप्ताह में संभव हो तो 1 दिन मौन रहो। युवान भाई बहनों को दबाव नहीं डाल सकता क्यूँकी तुम्हें पढाई भी करनी है …आपका काम भी …..लेकिन जहाँ तक संभव हो …कोई काम नहीं है तो 2..3 घंटे का मौन रखो।
महीने में 1 दिन मौन रखो …बहुत ज़रुरी है। एक शक्ति इकट्ठी होती है।

 
31. तुलसी अस्तित्व की कोई व्यवस्था है …….अकस्मात नहीं।
तुलसी बोले तो मुझे लगे कि महादेव बोले। होंठ तुलसी के हिलते हैं …बोलते हैं मेरा विश्वनाथ।

 

32. मसान ………
शिव के लिये क्रीडा स्थली।
जीव के लिये जाग्रण की स्थली।
शव के लिये विश्राम स्थली।

 
33. ये ज़िन्दगी –
पाठशाला है ………ज्ञानी बनो।
व्यायाम शाला है ……कर्म करो।
भोजन शाला है ….सम्यक भोग भोगो।
धर्मशाला है …..आना है …कल जाना है।

 
34. मुझे कोई पूछे …..आप क्या सिखाते हो ?……
मैं रोना सिखाता हूँ।

 
35. सदगुरू चरण मां मारे कायम दिवाड़ी ….
जोई नहीं में तो क्यारे …रैन अंधारी …..
(सदगुरू के चरण में तो मेरी हमेशा दिवाली ही होती है …कभी मैंने अंधेरी रात देखी ही नहीं ….)

बापू के शब्द 
मानस मसान 
जय सियाराम

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