Morari Bapu all Quotes Thoughts in hindi

Morari Bapu Quotes and Thoughts part 6

Morari Bapu Quotes and Thoughts part- 6

मोरारी बापू के विचार और वाक्य पार्ट – 6

मोरारी बापू द्वारा 800 वीं मानस मसान राम कथा वाराणसी, काशी में 21.10.2017 – 29.10.2017 के बीच सम्पन्न हुई। जिस कथा के कुछ अंश, कुछ विचार आपके सामने रखे जा रहे हैं –

1. काशी को महा स्मशान माना गया है और हम सब जानते हैं कि स्मशान हम जैसों को ब्रिडा देता है। ब्रिडा माने दुख …ब्रिडा माने पीड़ा ..ब्रिडा माने भय …आतंक ..डराते …स्मशान हम जैसों को भय देता है। लेकिन निरंतर ..जिस स्मशान में …जो विश्वनाथ रहता है उसको ब्रिडा नहीं देता …उसको तो स्मशानेश्वा क्रीडा …वो तो क्रीडा करता है।

 

2. मेरे भाई बहन आप मेरी बात आप मानो कि ना मानो उसपे मेरा कोई दबाव नहीं …आप स्वतंत्र हो लेकिन सुनो ठीक से। ये स्मशान ऐसी जगह है जहाँ जाने वाला सदा के लिये सो जाता है ….और जहाँ ठीक से पहुँच जाता है …वहाँ सदा के लिये जाग भी जाता है।
यदि सदा के लिये जागना है …..तो जाओ मसान।
और सदा के लिये सोना है ……तो जाओ मसान।
क्यूँकी 1 बार वहाँ गया …सदा के लिये सो गया ….फिर कोई उसको उठाता नहीं …और स्मशान का अध्यात्म जिसकी समझ में आ गया …तो सदा के लिये जाग गया।

 
3. मसान सत्य है।
मसान प्रेम है। प्रेम सबका स्वीकार करने का नाम है। तिरस्कार नहीं करेगा …उपेक्षा नहीं …मसान 1 ऐसी जगह है…. सबका स्वीकार करेगा …राजा ..रंक ..पंडित …कोई भी हो ….इसलिये मेरी दृष्टि में स्मशान सत्यभूमि है, स्मशान प्रेमभूमि है और स्मशान में 1 बार देह गया तो ….काशी में गया तो …तो फिर …दूसरी बार जनम ही नहीं लेना पड़ता …किसकी करुणा से?
महादेव की करुणा से …..तो स्मशान करुणा भी है।

 

4. मुझे युवान भाई बहन से बात करनी है 9 दिन कि स्मशान का भय निकाल दो।
स्मशान है ज्ञान भूमि …..और जहाँ महाकाल बैठा हो ….वहाँ काल का भय क्यूँ ?

 

5. सबसे बड़ी 2 दुविधा हमारी-
जीवन में प्रलोभन।
मृत्यु में भय।
भगवत कथा सुनते यदि जीवन में से प्रलोभन निकल जाये और मृत्यु का भय निकल जाये …तो मुक्ति अपनी मुट्ठी में हो सकती है। जीवन की प्रसन्नता अपने काबू में हो सकती है।

 

6. मसान और मानस ..उसमें भी संगती है। अक्षरों की दृष्टि से थोड़ा इधर उधर करो तो कभी कभी मुझे लगता है ये मानस स्वयं मसान(श्मशान) है।
या तो सदा विश्राम देता है …या तो सदा जागृत कर देता है।

 
7. व्यास्पीठ 1 ही बात आपके दिल तक पहुँचाना चाहती है। जिसको मरन का आनंद लेना है …वो सुमिरन बढाये।
मरन उसका महोत्सव है …जो सुमिरन बढाये।

 
8. मुझे कभी कोई स्मशान में डर ना लगे …क्यूँकी मैं सोता रहता हूँ। डर काहे का यार ?
जीवित का डर रखो क्यूँकी ये कभी भी तुम्हारी निंदा करेगा …जो मर गया वो तो बेचारा देवता हो गया यार …तुम्हारा क्या बिगाड़ेगा ?
यही तो पीछे से टांग खींचेंगे …आगे से पैर पडेंगे ..पीछे से कहेंगे ये तो ऐसे ही हैं ….ये जीवित भूतों से बचो।

 

9. कथा में जब तक हूँ ….आप भूत …मैं महाभूत …ऐसा समझो …ऊपर बैठा हूँ तो महाभूत …..
और हम सबका नाथ है …उसका नाम है भूतनाथ।
जय भूतनाथ !… जय भूतनाथ !… जय भूतनाथ !…
हम अनाथ थोड़े हैं?
हमारा नाथ है जिसको कहते हैं भूतनाथ।

 

10. जीयो तो ऐसे जीयो …कि सब हमारे हैं।
मरो तो ऐसे मरो …कि हमारा कुछ भी नहीं।

 
11. बहनों तुम भी जाना मसान में …हाँ… 2 – 4 भूत आयेंगे तो कहना पैर दबाकर ..चरण सेवा करके चला जा।
बहनों को इसलिये मैं बोला कि शिव और पार्वती दोनों स्मशान में क्रीडा करते रहते हैं ….स्मशान का 1 सगोत्री शब्द है पितृ गृह …स्मशान मतलब पितृ गृह….ये हमारे माँ बाप हैं शिव और पार्वती …उसका घर है स्मशान ….तो हमारे बाप का घर हो गया …भागते क्यूँ हो ?

 

12. मुझे सबसे बड़ा आनंद दायक 1 निवेदन यदि Osho का …मैने पहली बार Osho की magazine से पढ़ा …उसने कहा कि निर्गुण …निराकार ब्रह्म ..परम तत्व जो है …..उसको इस विश्व में …14 ब्रह्मांड में ….त्रिभुवन में ….इस परम तत्व को जब पहली बार किसी नाम से पुकारा गया। वो नाम है – राम।

 
13. माला 1 बहुत बड़ा विज्ञान है। माला लेकर कोई बैठ जाता है तो ब्रह्म नीचे आ जाता है।
लेकिन माला जपते समय भी हमारी आँखों का कोई ठिकाना नहीं। माला श्राप ना दे…इसका ध्यान रखना।
माला मालामाल भी कर सकती है और माला ………….श्राप तो नहीं देगी …..
लेकिन थोड़ा सुधार किया जाये।
14.  1 प्रश्न …
बापू KBC में आप अगर 7 करोड जीत जायें …तो आगे राम कथा जारी रखेंगे …या कथा से संन्यास ले लेंगे ?
बापू बोले …मेरी दौलत ये पूरा जहान है ….और सबसे बड़ी दौलत मेरी ये राम चरित मानस है ….
जितना मैने पाया …और गाऊँगा …और नाचूँगा …और पुकारूँगा ….और बार बार आऊँगा …बार बार गाऊँगा।

 

15.  1 प्रश्न …बापू किसी में अच्छी quality हो …तो हम उसे कैसे प्राप्त करें ?….
बापू बोले ….उसकी ईर्षा ना करने से अच्छी quality धीरे धीरे आती है।
जो हमसे अच्छे हैं उसकी ईर्ष्या ना करें …शांत चित्त से उसको ग्रहन करें।
16. बावा माने फकीरी …..
जब लुटाना हो तब पीछे मुड़कर नहीं देखना ….इस फकीरी को बावा कहते हैं।

 

17. गुरू वचन पर विश्वास नहीं तो विश्व में कोई सिद्धी नहीं।

 

18. बहुत सोच समझकर किसी बुद्धपुरूष की शरण में जाईयेगा ……और जाने के बाद उसके वचन का कोई विकल्प खड़ा मत करियेगा ….
विकल्प खड़ा किया तो ज़िम्मेदारी गुरू की नहीं …हमारी है।

 

अगले पेज पर जाइये

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *