morari bapu

Sukhi Kaise rahe : Morari Bapu

Sukhi Kaise rahe : Morari Bapu

सुखी कैसे रहें : मोरारी बापू 

मानस मसान राम कथा में मोरारी बापू कहते हैं कि

हमें सुखी होना है (बाल कांड)

मन में निर्णय करो। सुखी सब होना चाहते हैं लेकिन पक्का निर्णय करो।
क्यों हम दुखी हों(Hum kyo Dukhi ho) ? कौन गुनाह किया( humne kya gunah kiya) ?

लेकिन शर्त ये हो कि हम सुखी होना चाहते हैं, दूसरे को दुखी किये बिना, सुखी होना हमारा अधिकार है ….करो संकल्प ….लेकिन साथ साथ ये भी कि किसीको दुखी करके मैं सुखी होना नहीं चाहता।

 

राम चरित मानस के बालकांड का सार है सुख प्राप्ती ….लेकिन कैसे ?…उसकी formula भी बतायी है।
हमारे पुरूषार्थ से जो सुख मिलेगा ….हमारी किस्मत से जो सुख मिलेगा …उसके साथ दुख सदैव जुड़ा होगा। लेकिन किसी के प्रसाद से जो सुख मिलेगा …उसमें दुख की संभावना नहीं है …हमें ऐसा सुख चाहिये जो प्रसाद से प्राप्त हो।

kismat or mehnat me bada kaun hai : किस्मत और मेहनत में बड़ा कौन है? 

नसीब(किस्मत) और पुरूषार्थ(मेहनत) दोनों ज़रुरी हैं । किस्मत ज़्यादा बलवान कि पुरूषार्थ ज़्यादा बलवान ? आज ये प्रश्न सबको डांवाडोल कर रहा है कि प्रार्बध महान कि पुरूषार्थ महान ?….

हाथ में जो रेखा है ..वो प्रारब्ध की रेखा मानी जाती हैं । जो हम ज्योतिष को दिखाते हैं …वो तो हो गया किस्मत ।

लेकिन परमात्मा ने रेखाओं से …ऊँगलियाँ आगे कर दी ……ऊंगलियाँ मतलब हाथ का अग्र भाग, वो पुरूषार्थ का प्रतीक है।

किस्मत बैठा हुआ है …पुरूषार्थ क्रियान्वित है …..प्रारब्ध से पुरूषार्थ आगे है।

जब हम दूसरों को दुखी करके सुख प्राप्त करना चाहते हैं तब प्रसाद से मिला हुआ सुख भी सापेक्ष हो जाता है …दुख से जुड जाता है और जब प्रसाद से सुख मिल जाये तो फिर 1 संकल्प और करना बच्चों कि मैं इस सुख को थोड़ा बांटूँ ….
रहम से मिला हुआ सुख ही दुख मुक्त है …बाकी सभी सुख …..दुख से सटा है।

हमें कितना डराया गया है …ये दुनिया दुख है …मरणधर्मा है। अरे जब दुख आयेगा..मर जायेंगे ….डराते क्यूँ हो ? बूढे हो जाओगे …मर जाओगे …रोगी हो जाओगे ……….तेरी जेब में है ये सब ?….दिये जा रहे हो ?
देना हो तो हरि नाम दो ….अभय करो …..बुद्धपुरूष कौन ?…जो अपने आश्रित को अभय करे।

बापू के शब्द 
मानस मसान 
जय सियाराम

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