Sad-Guru/Buddhpurush Kaisa hone chahiye?

Sad-Guru/Buddhpurush Kaisa hone chahiye?सद्गुरु/बुद्धपुरुष कैसा होना चाहिए? 

 

1. गुरू ऐसा करना जो मतवाला हो …चिडचिड करता हो उससे दुर्योजन …दूर योजन(दूरी बना लो)। गुरू अच्छा गाता होना चाहिये …मतवाला मतलब पीनेवाला नहीं …ज़रूर पी है लेकिन कौनसी?
नाम खुमारी नानका ..चढी रहे दिन रैन।

 

गुरू चले तो लगे कोई मदमस्त गज चल रहा है।
गुरू बोले तो लगे कि गिर का कोई शेर दहाड़ रहा है।
गुरू आँखें बंद करे तो लगे कि बुद्ध की छवि नज़र आ रही है।
गुरू आँखें खोले तो ..आदिदेव नमस्तुभ्यं …प्रसीद मम भास्कर ….उजाला हो जाये।
गुरू बैठे तो लगे कोई जोगंदर बैठा है।

 

2. गुरू सत वाला होना चाहिये …सत्य विग्रह हो …हमें आत्मा कहे कि ये आदमी झूठ बोल ही नहीं सकता …गवाही की ज़रूरत नहीं।

 

3. गुरू होना चाहिये गत वाला ….गत …जड़ नहीं …बहती गंगा ….प्रवाही परंपरा।

 

4. गुरू हो व्रत वाला ….व्रतधारी हो। लेकिन व्रत ने उसको ना पकड़ा हो ….गुरू ने व्रत को पकड़ा हो।

 

5. गुरू चाहिये पत वाला ….1000 शिष्य बिगड जायें ना संसार में तो कोई घाटा नहीं हो सकता। लेकिन कोई 1 बुद्धपुरूष थोड़ा चलित हो जाये …तो 2..3 शताब्दी जगत को धक्का लग जाता है …गुरू अपना पत ना चूके।

और इस मतवाले गुरू ने क्या किया ?…

कोई मतवाला आया मेरे द्वारे ….
अँखियों में कर गया अजब इशारे ….

ऐसा मतवाला जगतगुरू है भगवान कृष्ण ….
ऐसा मतवाला त्रिभुवन गुरू है मेरा महादेव …..
ऐसे मतवाले हैं मेरे राघव …..
ऐसे मतवाले गुरू हैं कबीर ….
ऐसे मतवाले गुरू हैं…गुरू नानक ….
ऐसी मतवाली है मीरा ….

सदगुरू क्या करता है ?…संकेत में बातें करता है ….
जिन आँखों में विकार ना हो …लेकिन उपासना भरी हो …उनके इशारे समझियेगा …….

मोरारी बापू के शब्द (मानस राम जनम के हेतु अनेका)
जय सियाराम

पढ़ें : गुरु महिमा
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