Satsang aur Kusang Kya hai?

Satsang aur Kusang Kya hai?

सत्संग और कुसंग क्या है?

सत्संग और कुसंग में क्या अंतर है? मोरारी बापू राम कथा में समझा रहे हैं कि

कुसंग(Kusang) क्या है? सतसंग(Satsang) क्या है?

उसका थोड़ा विश्लेषण …analysis ….

1. काम कुसंग है। राम सतसंग है।
रति विहीन काम कुसंग है, केवल काम कुसंग है। भरत कहते हैं मुझे रति चाहिये, काम नहीं। रति नहीं तो काम टिकाऊ नहीं। शिव की आँख जलाकर भस्म कर देगा …रति माने प्रीति। प्रीति युक्त सद काम …प्रेम युक्त काम …आत्मिक काम ये सतसंग है।

 

2. क्रोध काम है लेकिन बोध सतसंग है। मैं आपसे निवेदन करके जाऊँ युवान भाई बहन …जो बार बार क्रोध करते हैं …कथा सुनी है 9 दिन तो थोड़े सम्यक हो …तुम्हारे क्रोध के कारण कितनी कितनी खतरनाक चीजें पैदा हो जाती हैं। क्रोध को शास्त्रों में चांडाल कहा है। मेरे क्रोध करने से कितना बिगड जाता है ये बोध होना चाहिये। बोध सतसंग है।
युवान भाई बहन को खास ….तुम्हारे माँ बाप क्रोध करें …वो aged हैं …उसका स्वभाव ….अब उम्र के लायक थोड़ा क्रोध करें तो अनसुना करो। बाकी तुम मत करो। तुम्हारी ऊर्जा है। तुम्हारा क्रोध हिंसक बन सकता है।

6 समय क्रोध ना करो …please.
सुबह में जागते ही क्रोध ना करो।
पूजा के समय क्रोध ना करो।
घर से बाहर जाओ …ऑफिस ..खेत तब।
फिर घर में अाओ तो क्रोध लेकर मत आना।
भोजन करते समय।
सोते समय क्रोध करके मत सो।

3. लोभ है कुसंग। लेकिन मैं इतना बड़ा लोभ कर रहा हूँ …दूसरे को मिलना चाहिये वो भी मैं छीन रहा हूँ ..उसका क्षोभ …ये है सतसंग। ग्लानि …पीडा कि मैने कितनों का इकट्ठा करके खजाने में रखा। इसलिये मैं कहता हूँ दशांश निकालो।

4. मद – जब पद कोई आपको बड़ा मिल गया, खिताब मिल गया दुनिया आपकी जयजयकार करे …मद आये तब किसी का पद य़ा किसी की पादुका को याद करना …ये सतसंग है। पादुका सतसंग है।

 

5. मोह – मूढता जगे …ये कुसंग है …मोह की दिशा बदलो …मोह और आसक्ती को हरि की ओर।

 

6. मत्सर …माने अहंकार …दिखावा…मैं तुमसे आगे हूँ ऐसी राक्षसी उदघोषणा कुसंग है। उसी समय मच्छर को याद करना ये सतसंग है। .अपनी जात को मच्छर की तरह समझना। हनुमानजी स्वयं मच्छर जितने हो गये…400 मील का सागर लांघकर आये …कोई मत्सर नहीं ….अभिमान नहीं।

मोरारी बापू के शब्द
मानस सतसंग
जय सियाराम

 

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