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Sadhu Kaun Hai

Sadhu Kaun Hai

साधु कौन है

Who is Sadhu in hindi 

मोरारी बापू जी मानस पंचाग्नि कथा में बड़ा ही सुंदर बता रहे हैं कि साधु कौन है? आइये उन्हें के शब्दों में सुनते हैं

मोरारी बापू कह रहे हैं–

मेरे तुलसीदासजी ने साधु की परिभाषा करते हुए लिखा है साधु किसको कहें? जिसमें अलौकिक विवेक हो ..साधु कैसा हो तो कहते हैं ..सील गहनि ..विवेक सभ्यता..रहन सहन ..कौन साधु है?

 

एक तो ग्रह त्याग करे वो साधु ..केवल साधु ..जिसने घर छोड दिया है ..वो साधु है विभीषण ..लेकिन घर हम कब छोडते हैं? जब कोई लात मारे ..तब ..विभीषण लात का साधु है ..लात मारी रावण ने ..साधु हो गया …

 

एक होता है सुठी साधु ..सुठी साधु माने सुंदर साधु ..गमतो साधु ..मनभावन साधु ..ज़िसके साथ बोलना अच्छा लगे ..जिसको मिलना अच्छा लगे ..ज़िसके पास बैठना अच्छा लगे ..उठा ना दे तो ..जिसके साथ खाना अच्छा लगे ..सब अच्छा लगे ..सुठी का अर्थ है प्यारा ..सुंदर ..मनभावन ..

 

तुलसी राम के लिये साधु शब्द के आगे सुठी विशेषण ..राम सुठी साधु ..सुंदर साधु है ..मनभावन साधु है ..जिसका स्वभाव दुश्मन को भी प्रिय लगता है …

है नीको मेरो देवता कोसलपति राम।

सुभग सरोरुह लोचन, सुठि सुंदर स्याम।।

नीको ..प्यारो..सुठी ..सुंदर ..शीलवान ..अच्छे स्वभाववाला …

बलि-पूजा चाहत नहीं, चाहत एक प्रीति।

सुमिरत ही मानै भलो, पावन सब रीति।।

 

तुलसी अपने गमतो राम ..उसकी प्रतिष्ठा करते हुए कहते हैं ..किसीने पूछा ..तुम राम के उपासक हो इसलिये कहते हो राम बहुत प्यारा ..लेकिन बताओ तो सही इसमें प्यारा होने का reason ..कौनसे कारण हैं ? तो कहते हैं कि कभी ना कहे कि तुम बलिदान चढाओ ..तुम बलि हो जाओ ..तुम बलिदान दो ..तुम त्यागो ..तुम वैरागी हो जाओ ..कुछ नहीं कहता राम ..बलि का 1 अर्थ बलि देना ..कुर्बान होना ..बलि चढाना अथवा तो तगड़ी पूजा ..उसको भी बलि पूजा कहते हैं ..तगड़ी पूजा ..षोडोशोपचार ..पंचोपचार ..सप्तोपचार ..इतने चांदी के बरतन लाओ ..इतना गंगाजल लाओ ..इतना यमुना जल ..इतनी केसर की डिब्बी खाली कर दो ..चन्दन इतना लाओ ..इतना सूखा मेवा ..इतना गीला मेवा लाओ ..ये सब बलिपूजा है।

 

 

 

राम क्यूँ प्यारा है? कृष्ण क्यूँ प्यारा है ? महादेव क्यूँ प्यारा है ? क्यूँकी वो बलि पूजा नहीं चाहता ..तेरा थोड़ा सा प्यार चाहता है …बस तू केवल प्यार कर प्रभू से केवल थोड़ा सा वो भी पूरा नहीं ..जीव बेचारा कहाँ पूरा प्यार कर सकेगा ? तू उसकी आँख को प्यार कर ..तू उसके होंठों को प्यार कर ..होठों means उसकी बोली को प्यार कर ..तू उसके हाथ को प्यार कर ..ये सब मधुर हैं ..मधुराधिपतेरखिलं मधुरं ..अधरं मधुरं ..वदनं मधुरं ..नयनं मधुरं ..हसितं मधुरं ..ह्रदयं मधुरं ..गमनं मधुरं …तू उससे छोटा सा प्यार कर ..वेणीभाई पुरोहित ने गुजराती में लिखा ..

 

तारी आँख नो अफीणी ..तारा बोल नो बंधाणी ..

तारा रूप नी पूनम नो पागल एकलो …

मुझे कहना है वो ये कहना है ..एकदम सरल करता हूँ ..छोटा सा प्यार ..थोड़ा करो ..निभाओ ..

जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा ..

रोके ज़माना चाहे..रोके खुदाई ..तुमको आना पड़ेगा ..

चाहुंगा मैं तुझे साँझ सवेरे ..फिर भी कभी अब नाम को तेरे ..आवाज मैं ना दूँगा ..

आप सुनो …मेरी कथा के रहस्य सुननेके लिये आपको फिल्म के गाने भी सीखने पड़ेंगे ..क्यूँकि मैं कहना क्या चाहता हूँ वो तो अधरं मधुरं है ..लेकिन समझाने के लिये ..लिये ..लिये ..लिये ..आ बधू आवे …(ये सब आयेगा

सुमिरत ही मानै भलो, पावन सब रीति।।

केवल 1 बार उसको याद कर लो ..उसको सिमर लो ..तो बहुत भला माने ..ओहोहो ..बहुत मुझे याद किया ..जिसकी प्रत्येक रीति पवित्र है ..ऐसा कौन है ? तुलसी कहे केवल मेरा देवता राम है ..जो सुठी है ..सुंदर है ..मन भावन है।

बापू के शब्द
मानस पंचाग्नि
जय सियाराम बाप

Note : This blog is written by Rupa Khant didi. रूपा खांट दीदी ने बापू के इन शब्दों को लिखा है।

Read : केदारनाथ कथा मोरारी बापू द्वारा

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