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Morari Bapu Ram Katha : Manas Shankar(Kedarnath)

Morari Bapu Ram Katha : Manas Shankar(Kedarnath)

मोरारी बापू राम कथा : मानस शंकर(केदारनाथ)

मोरारी बापू जी की केदारनाथ में राम कथा 20 से 28 मई 2017 तक हुई। जिसमे बापू ने मानस शंकर विषय को चुना। इस कथा के कुछ अंश आपके सामने दिए जा रहे हैं। मेरा विश्वास है आपको ऐसा ही लगेगा जैसे बापू बोल रहे हैं।

 

बापू कहते हैं —

एक बात समझ लो …तुम किसी भी भगवान को मानो …किसी को भी पूजो …पर भक्ती तो तुम्हें शंकर की कृपा के बिना मिल ही नहीं सकती।

मुझे तो 1 ही बात समझ में आती है कि ईश्वर की नहीं। ..लेकिन किसी बुद्धपुरूष की पहचान यदि हो ..तो केदार जितना मदत करता है ..उतना भुगोल में कोई और नहीं करता। ये भूखंड जितना मदत करता है कोई बुद्धपुरूष की पहचान के लिये ..उतना कोई भूखंड इतनी मात्रा में नहीं करता।

शिव के 1000 नाम हैं बाप। 100 नाम इनमे से प्रधान माने गये। 1 बात मैं आपसे ये भी कह दूँ कि तुलसी ..केदार आये हुए हैं ..उत्तराखंड की यात्रा हुई है ..उसमें केदार वो खास आये थे ..और तुलसी यहाँ आये तो हमको तो यहाँ आना ही था ..हम सबको।
तुलसी कहते हैं की शंकर के 100 नाम जपो तो ..की हुई गलती की ग्लानी से तुम मुक्त हो जाओगे ..

भगवान के 1000 नाम में से या तो 100 नाम में से तुलसी को राम चरित मानस आरंभ करने को शंकर नाम ही याद आया।
वो जो शास्त्रीय शत नाम हैं शंकर के ..वो तो श्लोकों में है ..और उसका तो भाषांतर भी उपलब्ध है ..लेकिन आप यदि उसमें ना जा सके ..तो मैने आपको पहले भी कहा था और कहता रहता हूँ की ..24 घंटे में ..हम जीव हैं ना ..संसारी हैं ..मन ..वचन ..कर्म से कोई चूक ..कोई भूल ..कोई अनीति ..कुछ भी हो जाता है ..तो उसके निवारण के लिये आदमी रोज शंकर नाम का जप करें 100 बार …

तुलसी ने तो 100 बार की बात कही लेकिन 1 माला कर लेनी ..शंकर ..शंकर ..शंकर ..बहुत कृपालू है ..ऐसा केदार कोई नहीं।

Meaning of Kedarnath in hindi : केदार के अर्थ 

मैने पढा है और गुरू कृपा से पता लगा कि केदार का अर्थ होता हैजाति स्वभाव और कहते हैं कि जाति स्वभाव मिटाया नहीं जा सकता ..अखंड है ये ..’

दूसरा केदार का अर्थ है पर्वत का नाम

केदार का अर्थ होता है-जिस खेत में आप बीज बो देते हैं ..उस खेत को केदार कहते हैं ..जब हमारे अंत:करण में हम कोई सूत्र ..अध्यात्मिक यात्रा के लिये बो देते हैं ..तब हमारा अंत:करण केदार बन जाता है ..यहाँ आते हैं ये तो प्रत्यक्ष दर्शन है ..लेकिन अपने आप को हम केदार बना सकते हैं।

एक वटवृक्ष हो ..आम का वृक्ष हो ..चारों ओर आपने खुदाई की है ..और फिर चार ओर से उस गड्डे में पानी सिंचते हैं ..तो उस वर्तुलाकार को भी केदार कहते हैं ..सींचना केदार है ..निरंतर बोये हुए बीज को शिव सूत्र से सींचना निरंतर हमारे साथ चलता केदार है।

 

और बहुत सरल पडेगा आपको केदार का अर्थ और वो है ..प्यारा राग है केदार ..केदार राग फिर गाते गाते अनुराग में परिवर्तित हो जाता है।

 

और केदार नाथ। जब नाथ जुड़ जाता है केदार के साथ तो उसकी अर्थ छाया और प्यारी बन जाती है ..नाथ का अर्थ होता है स्वामी ..हमारा पति।

बैल या भैंस का नाथ छेदकर 1 रस्सी डाली जाती है ..और डोरी को पकड़कर दायें बायें मोड़ सकते हैं उसको नाथ कहते हैं ..नाथ का मतलब है 1 control ..अंकुश करना ..निरंकुश बैल को ..भैंस को ..मन को ..अंकुश में रखना ..उसको नाथ कहते हैं।
नाक में मातायें जो नथनी पहनती हैं ..श्रीनाथजी जो नाथद्वारा में बिराजमान हैं ..उनके नाक में नथनी होती है ..वो थोड़ा शक्ती स्वरूपा है ..नाक आबरू और प्रतिष्ठा का अंग है ..खानदानी और प्रतिष्ठा को विशेष सुशोभित करें वोही है नथनी ..कहते हैं मीरा ने भी नथनी पहनी थी ..राधा भी पहनती थी।

 

उत्तराखंड से आये मेरे हिन्दी भाषी और जो पुरोहित आये हैं ..1 minute मेरे साथ सोमनाथ सौराष्ट्र की भूमी में तो आना ही पडेगा।

कान्हा जडी होय तो आप ..कान्हा जडी होय तो आप
रास रमंता मारी नथणी खोवाणी

मेरी नथनी खो गयी है रास खेल में ..मेरी प्रतिष्ठा गयी.. साधु संग बैठ बैठ..लोक लाज खोयी ..तू मेरी आबरू फिर से ला दे ..ये जो भाव गीत में सौराष्ट्र में ऐसा गाते हैं …और राधा को ..मीरा को ..गोपी को पता है की नथ कृष्ण ही ले गया है …कृष्ण जिसपर बहुत प्रेम करने लगता है तब उसको बेआबरू करने लगता है ..याद रखियेगा ये कृष्ण करूणा है ।

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ये तो कहना ही पड़ेगा ..केदार में आये हैं तो भी कहना पड़ेगा की पहला तो सोमनाथ ही है ..इसमें मेरा क्या कसूर ..ज़माने का कसूर …ज़िसने ये दस्तूर बनाया।
सौराष्ट्रे सोमनाथं च ….

मैने पढा ..केदार शब्द अर्बी भाषा में आया ..केदार शब्द का अर्थ आता है ..बहुत powerful …उससे ज़्यादा कोई powerful हो ही नहीं सकता ..हमारे केदार के समान कोई शक्ती पुंज हो ही नहीं सकता।

Kedarnath Kaisa hai ? केदारनाथ कैसा है ?

मैं ये पहले भी बोला था और आज भी कहूँ की ये त्रिकोण आकार का जो केदार है ..ये त्रिकोण तो मुझे सदा सदा सत्य ..प्रेम.. करूणा के रूप में ही दिखायी देते हैं।

 

1. वस्तु याद रखना मेरे भाई बहन ..अपनी रक्षा सत्य के बिना कभी नहीं हो सकती …बचायेगा सत्य ही …थोडी देर राहत मिल सकती है ..हाँ parole पे आप छूट सकते हैं ..लेकिन बाइज्जत होना तो सत्य के सिवा नहीं ..सत्य रक्षक है ऐसा मैं समझता हूँ और अनुभव भी है।

दूसरा कोना प्रेम है ..जो पालक है ..प्रेम के बिना पालन नहीं होगा ..प्रेम पोषण करेगा …

 

तीसरा कोना है करूणा ..जो हमारी कठोरता की मात्रा को कम करता है।

 

कितने साल हो गये पता नहीं शायद ’89 में यहाँ कथा हुई थी। ..इतने सालों बाद भगवान केदार का बुलावा आया ..मुझे लगता है की केवल भगवान केदार की कृपा और परांबा भगवती की कृपा का ये फल है की आज हम सब यहाँ हैं ..मैं कल रात तक कोई निर्णय पर नहीं था की मैं किस विषय पर बोलूं ..गत कथा में शिव सूत्र पर कथा हुई थी ..बहुत गहन था ..सबको बहुत भारी पड़ा था …इस बार गुरू कृपा से मैं सोच रहा था की 2 बातें बह रही हैं ..1 तो केदारनाथ यहाँ ..शंकर का स्मरण ..और दूसरा शंकर का तर्पण।

 

आओ हम मिलकर के भगवान केदार का स्मरण करें और इसी शंकर का जो सीधा अवतार है ..उस हमारे जगदगुरू आदि शंकाराचार्य का तर्पण भी करें ..एक बार दोनों शंकर को याद करें।
और शंकर का 1 अवतार मेरे पीछे तो बैठा ही है हनुमान ..क्यूँ ना उनके स्मरण और तर्पण के लिये ये कथा गायी जाये ..इसलिये बाप ..इस कथा का subject रहेगा …मानस शंकर।

 

केदारनाथ की बड़ी दुर्गम यात्रा है ..इतनी सुविधा होने के बाद भी ..सबकुछ हो जाये लेकिन मौसम का क्या करो ?…वो switch तो उनके हाथ में है ..केदारेश्वर के हाथ में …आप यहाँ आये हैं स्वागत है ..जितने दिन अनुकूल हो ठहरना ..बाकी फिर उतर भी जाना …ज़िद मत करना यहाँ आकर के …1 दिन ठहर गये बहुत है ..9 दिन रहो स्वागत है ..स्वास्थ्य का ध्यान रखना ..यहाँ सुबह सुबह कथा होगी फिर बार बार मुझे मिलने आनेकी ज़रूरत नहीं है ..आप अपने हाथ से तबियत ना बिगाड़े please ..यहाँ कथा सुनो ..सम्यक भोजन लो ..दर्शन करो ..आराम करो ..फिर घर जाकर आराम ही नहीं ..जितना कर सको करो ना ..इससे बढ़िया अमुल्य hill station कौनसा होगा ..तो आराम करो।

 

लेकिन सांस चढ रही है माताओं की ..भाईयों की ..भागे जा रहे हैं ..मैं पहचान भी नहीं सकता इतने तो कपड़े पहने हैं ..पहनना हाँ please ..मेरी देखा देखी मत करना यार ..मुझे भी लगेगी सर्दी तो मैं पहन लूँगा ..लेकिन मेरा शरीर मेरे परमात्मा ने कुछ और बनाया है ..फिर भी मैं इंसान हूँ ..ज़रा भी risk नहीं लूँगा क्यूँकी मुझे बहुत कथा गानी है ..मेरे तुलसी ने मुझे सिखाया है की ये शरीर ना हो तो भजन कैसे करोगे ? तबियत ठीक ना लगे तो निकल जाना ..यहाँ तक आ गये तो शंकर ने लिख लिया की आप कथा में आये थे …और खाली खाली जा रहे हैं ..ये भी लिख लेगा …यार खाली जाये की भरे जाये ..हाजरी लग गयी बहुत है ..महादेव को पता लगे की वो आया था ..बात खतम हो गयी।

 

बापू के शब्द
मानस शंकर
जय सियाराम बाप

This blog is written by My Dear elder sister Rupa Khant. बापू के इन शब्दों को, इन भावों को, इस ब्लॉग को मेरी दीदी रूपा खांट द्वारा लिखा गया है।

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