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Morari Bapu Ram Katha : Manas PANCHAGNI

Morari Bapu Ram Katha : Manas PANCHAGNI

मोरारी बापू राम कथा : मानस पंचाग्नी

 

मोरारी बापू जी की राम कथा महाराष्ट्र में 10 से 18 जून 2017 तक है। बापू सोच रहे हैं कि यहाँ पर किस विषय पर बोला जाये। हम उन्ही के शब्दों में दर्शन करते हैं–

मोरारी बापू कह रहे हैं —

 

मन में हुआ की क्यूँ ना मेरी व्यास्पीठ पंचगिनी में मानस पंचाग्नी पर कथा करे..ये मानस पंचाग्नी है। ..पंचाग्नी का हमारी साधना में बहुत ..क्यूँकि अग्नि की महिमा ही हमारे यहाँ बहुत है ..सबसे सनातन ..पुरातन ..कोई सालों की गणना में हमें नहीं जाना है ..लेकिन सबसे पहला ऋग्वेद जब उतरा तो ऋग्वेद का आरंभ मेरे देश के ऋषियों ने अग्नि शब्द से ही किया था। …पूरे वेद का आरंभ अग्नि शब्द से हुआ। ..अग्नि की साधना का बहुत महत्त्व है साहब ..आपको पता होगा ही ..लेकिन वाणी की साधना भी अग्नि की ही साधना मानी गयी है ..शास्त्र में शिव का 1 नाम अग्नि है ..शिव माने अग्नि ..अग्नि का उपासक मूलत: शिव उपासक है।

 

मानस पंचाग्नी ये 9 दिन की कथा हमारी पंचाग्नी तपस्या हो जायेगी ..हम कह सकेंगे कि हम पंचगिनी में पंचाग्नी धुणी तपे थे ..9 दिन की ये साधना है।
राम चरित मानस में अग्नि के लिये 5 ही शब्द तुलसी ने निश्चित किये हैं ..छट्ठा शब्द नहीं है ..मानस में यही हैं पंचाग्नि।
अगिनी …अनल ..पावक ..अंगार ..कृसानु …
ये मानस की पंचाग्नि है ..और सुंदर कांड में पाँचों हैं …

मानस के आधार पर 5 याद रखें ..

1. योगागनि (Yogagni)
2. वियोगागनि (Viyogagni)
3. यज्ञाग्नि (yagyagni)
4. क्रोधाग्नि (karodhagni)
5. विवेकाग्नि (Vivekagni)

राम का असली बाप अग्नि है आधिदैविक जगत में .. सांसारिक जगत में दशरथ। …
अग्नि पुत्र है राघव ..और जानकी भी अग्नि की बेटी है ..अब ये तो अति विचित्र लगेगा ..

 

राक्षसों ने बहुत ऋषि मुनियों को किया ..रक्त उछाले और रक्त का घड़ा भरा ..और महात्माओं का रक्त का घड़ा जो भरा गया था और गाढा गया था ..उसमें महात्माओं का क्रोध और श्राप भरा था ..और इस घड़े को ..जब हल जोता और निकला ..इसमें से जानकी निकली है ..इसलिये तत्वत: जानकी भी अग्नि पुत्री है ..ऋषियों के रोषाग्नि से प्रगट हुई है ..

यज्ञ प्रसाद से राघव प्रगट हुए ..

विषय थोड़ा कठिन है ..लेकिन आप भी तो कोई कम नहीं हैं ..मुझे इतने सालों से सुन रहे हैं तो आप भी तो …
नगीन बापा एम कहे के मोरारी बापू नु काई ठेकाणो नहीं ..गम्मे त्यांथी गम्मे त्यां …अरे यार दरवाजे सब खुले रखो ना तो हवा कहीं से भी आती है ..वैसे ही आदमी आर पार रहे तो पवनपुत्र कहीं से भी आ जाता है। ..वैसे इरादा तो नहीं था पंचाग्नि पर बोलें ..लेकिन लगता है अच्छा subject ..मुझे आनंद के लिये मिल गया है और हो सकता है आपको भी आनंद आये ..लेकिन ये मेरी कथा की अग्नि है ना ..आपको रोशनी देगा ..दजाड़शे नहीं (जलायेगी नहीं )एनो भरोसो राखजो ..रोशनी देगा ..प्रकाश देगा ..थोड़ा उघाड हो ..कुछ नयी रोशनी मिले इस भीगे मौसम में ।

 

मैं तो अग्नि के पास बैठा रहता हूँ ..इसलिये कुछ अग्नि के अनुभव भी हैं ..इसलिये अग्नि पे बोलनेका थोड़ा मुझे अधिकार भी है ..yes …

अग्नि मुस्कुराता है ..भांगती राते ..ये है सभ्याग्नि …तमारी साथे वातो करे..भाषा उसकी होगी ..शुरुआत में कल्पना होती है कि हमसे बात होती है ..फिर धीरे धीरे वास्तविकता बनती जाती है।
हम जो भी बोलें अग्नि तत्व है ..वाणी अग्नि तत्व है ..ध्यान देना ..भूलना मत ..प्रत्येक व्यक्ति की वाणी अग्नि तत्व है।
तो हम जो बोलें वो अग्नि तत्व है तो अग्नि में वाणी नहीं हो सकती क्या ?…

वाणी में यदि अग्नि है तो अग्नि में वाणी नहीं हो सकती ? हम सुन नहीं पाते ये बात और है …
अग्नि मुस्कुरायेगी और अग्नि जब मुस्कुराती है तो उसका colour बदल जाता है ..अग्नि के 7 रंग हैं ..colourful है अग्नि …

पंचाग्नि नो धुणो छे आ ..ये और कुछ नहीं ..ये अतीत नो पंचाग्नि नो धुणो छे साहेब ..राख वडी जती होय छे पण कोई गुरू चिपियो मारे तो अे राख उडे अने अे अंगार ..ये अग्नि शिरायें जो ब्रह्म को भी प्रगट कर सकती है ..ऐसा अग्नि प्रगट होता है।

 

मोरारी बापू(Morari Bapu) के इन शब्दों को रूपा खांट(Rupa Khant) दीदी ने लिखा है।

Read : मोरारी बापू द्वारा मानस शंकर (केदारनाथ)

 

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