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Manas Pitru Devo Bhava : Ram Katha Morari Bapu Saputara

Manas Pitru  Devo Bhava : Ram Katha Morari Bapu Saputara

मानस पितृ देवो भव : राम कथा मोरारी बापू के द्वारा सापूतारा मे

मोरारी बापू द्वारा 797वीं राम कथा सापुतारा, गुजरात में 9 सितम्बर 2017 से 17 सितम्बर 2017 तक(09.09.2017 – 17.09.2017) । पितृ पक्ष, श्राद्ध पक्ष, कनागत के बीच मानस पितृ देवो भवमोरारी बापू ने जिन दो चौपाइयों का यहाँ पर आश्रय लेकर कथा का प्रारम्भ किया वो है –

कोउ पितु भगत बचन मन कर्मा। सपनेहुँ जान न दूसर धर्मा॥
सो सुत प्रिय पितु प्रान समाना। जद्यपि सो सब भाँति अयाना॥

भावार्थ : – यदि कोई मन, वचन और कर्म से पिता का ही भक्त होता है, स्वप्न में भी दूसरा धर्म नहीं जानता। वह पुत्र पिता को प्राणों के समान प्रिय होता है, यद्यपि (चाहे) वह सब प्रकार से अज्ञान (मूर्ख) ही हो।

 

मोरारी बापू के कुछ सूत्र, बापू के शिष्यों द्वारा उन्ही के शब्दों में लिखे जाते हैं। कोशिश की जाती है कि जैसे बापू बोलें वैसे ही लिखे जाएँ। उनमें से ही एक बापू को अपना आदर्श मानने वाली राम कथा प्रेमी ने ये सूत्र लिखें है। आप जिन्हें पढ़कर ऐसा ही अनुभव करोगे कि बापू ही बोल रहे हैं- आइये पढ़िए.. . जय सियाराम…

मोरारी बापू कहते हैं कि

गाँव में सब अनपढ लोग हों और 1 ही आदमी पढ़ा लिखा हो और गाँव में 1 ही दैनिक अखबार आता हो तो सब इकट्ठे हो जाते हैं ..मैने बचपन में देखा है और जो पढ़ा लिखा हो, शिक्षक हो, तलाठी मंत्री हो, जो भी हो …वो पढ़ता है …और गाँव वाले सुनते हैं।

मेरा काम इतना ही है। इसका मतलब ये नहीं कि आप अनपढ हैं। थोड़ा फेरफार करो …आप अनपढ नहीं है …आपकी जानकारी शायद दब चुकी है।

मेरा अखबार पढ़नेका नहीं …मेरा आपका ऐतबार पढ़ने का उपक्रम है।
आपका ऐतबार पढूँ मैं। आपके दिल में जो 1 भरोसा है ..1 विस्वास है …1 ऐतबार है …….उसको मैं पढूँ।
ताकी मेरा ऐतबार भी बढ़े…और आपका दबा हुआ ऐतबार बेपर्दा हो।

 

जागृत हो तो सब में कुछ ना कुछ है।

जागृत नहीं …तो किसी में सबकुछ है तो भी हमारे लिये कुछ भी नहीं।
सवाल है जागृती का …
चेतना किसको प्रगट होगी ??…जो जाग रहा है, जो जागृत है, उसीके यहाँ महत्त्व का प्रगट होता है।
रामकथा 1 प्रकाश लेकर आ रही है …कि हम जागें …हम सावधान रहें ..ताकि हमारी चेतना प्रगट हो।

 

व्यास्पीठ को सुनते सुनते कई लोग कहते हैं कि बापू सालों के व्यसन हमारे छूट गये। अब हम पकड़ने जाते हैं प्याला तो तुम्हारी सफेद दाढी दिखती है… कैसे पियें ?

व्यास्पीठ को पीयो। दुनिया में कभी कुछ पीने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। पयमाने में तो सीमित शराब होती है …पूरा मयखाना पीयो।

रामकथा 1 पयमाना नहीं ….1 मयखाना है।

 

मैने 1 बहुत प्यारा वाक्य सुना ..मुझे बहुत प्रीतिकर लगा …आत्मीय लगा ..और वो है ……..
तनहाई.. भजन करने के लिये…परमात्मा की ओर से दिया गया अवसर है।
एकांत उदासीन होने के लिये नहीं है। ईश्वर हमें मौका देता है कि ले तुझे तनहाई दी ..एकांत दिया …अब भज …भज माने प्रेम कर ..गा ..नाच।

 

आदमी को चाहिये अपना समय व्यर्थ ना बिताये। नींद आ जाये तो मेरी सलाह ..सो ही जाओ। माला भी मत लो …चलो …सो जाओ।
लेकिन यदि नींद ना आये तो कारण के बिना ये मोबाइल …और ऐसे …ऐसे ..ऐसे …साधन हमारी स्वतंत्रता ना छीन ले ।

ऐसे समय में …हरि ..हरि ..हे हरि।

तुलसी का पद गाओ …रात को नींद ना आये तो …हे हरि तूने मुझपर बहुत अनुग्रह किया है।

हरि तुम बहुत अनुग्रह कीन्हो
साधन धाम बिबुध दुरलभ तनु
मोहि कृपा करि दीन्हो……
हरि तुम बहुत अनुग्रह कीन्हो

बापू के शब्द
मानस पितृ देवो भव
जय सियाराम

Read : मोरारी बापू के विचार और शब्द

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