Shiv Sadhna Kaise Karen?

Shiv Sadhna Kaise Karen?

शिव साधना कैसे करें?

How to do Lord Shiva Sadhna in hindi

भगवान शिव जो परम कल्याणकारी हैं। जिनके नाम का अर्थ है- कल्याण। मोरारी बापू की केदारनाथ धाम में कथा हुई मानस शंकर। इसी कथा में एक साधक ने चिट्ठी के माध्यम से बापू से प्रश्न किया। जिसका उत्तर बापू दे रहे हैं। आप उन्ही के शब्दों में पढ़िए–

मोरारी बापू कह रहे हैं-

1 चिट्ठी .. आप कहते हैं स्वयंभू शंकर की साधना रात्री में 12 से 3 के मध्य में करनी चाहिये ..तो बापू साधना में क्या करें ? रुद्राष्टक का पाठ करें? राम मंत्र का जप करें ? अथवा अक्रिय होकर बैठ जायें?

बापू बोले ..इसका जवाब मैं आपकी रूचि के ऊपर छोड रहा हूँ। ..कोई विधि विधान ना करें.. हाँ इस काल के दरमियां आप रुद्राष्टक का पाठ करना चाहें तो ये अच्छा है …बस बैठें।

..केवल आप सुनें ऐसे मंद स्वर में रुद्राष्टक का पाठ करें …इससे भी ज़्यादा better ये रहेगा की आप स्वयंभू शिवलिंग की साधना में केवल राम महामंत्र का जप करें। क्यूँकी शिव को राम मंत्र अत्यंत प्रिय है ..इसका मतलब ये ना कहूँ कि ॐ नम: शिवाय ..ॐ नम: शिवाय आप ना करें ..please समझिये …ये मैं समझाने के लिये कह रहा हूँ ..अन्यथा मत लेना ..और अन्यथा लो तो मैं परवाह भी नहीं करता।

आप मेरे पास बैठे हैं और आप माला लेकर ये करें ..मोरारी बापू ..मोरारी बापू ..मोरारी बापू ..तो वो अच्छा नहीं लगेगा और मोरारी बापू को भी अच्छा नहीं लगेगा।

इसके बदले आप मेरे पास बैठे बैठे…मंगल भवन अमंगल हारी ..द्रवहु सु दसरथ अजिर बिहारी …तो मेरी व्यास्पीठ ज़्यादा प्रसन्न होगी।

तो महादेव के पास ॐ नम: शिवाय यदि आपका मंत्र है तो ज़रूर पढो। लेकिन शिव की विशेष प्रसन्नता पानी है तो ये तो राम मंत्र के सिवा नहीं साहब …राम ..श्री भी मत लगाना …श्री राम नहीं ..all in one केवल राम …।

ये प्रणव मंत्र है और देखो आप ॐ नम: शिवाय का जप बोलो तो शिव के पास ॐ ..ॐ ..ॐ ..बोलो …तो राम क्या है ?
ॐ ही तो है …राम प्रणव ही तो है ..राम मंत्र शब्द नहीं है ..1 नाद है ..1 Big Bang है जो अंदर के विश्व का विस्फोट है ..जगत बना ..1 बहुत बड़ी आवाज आयी विज्ञान कहता है जिसको Big Bang हम कहते हैं।

….साधको के लिये 1 अंदर वैश्विक विस्फोट होता है Big Bang और उसमें जो ध्वनि ..उसमें जो नाद ..उस समय का जो रव ..वो है राम ..तो राम नाम का जप करें …
फिर भी आप पूछ रहें हैं तो मैं मेरे विचार कहता हूँ की आप कोई भी मंत्र जप सकते हैं। ..सब एक हैं।

तीसरी बात आपने पूछी कि अक्रिय होकर बैठ जायें ? ये भी अच्छी बात है कुछ ना करें ..लेकिन मैं अक्रीय बैठ जाऊँ ये बोलना बहुत आसान है। हमारा मन इतना तैयार नहीं जो हमें अक्रीय होने दे।

शरीर को आप अक्रिय कर सको ..मन का क्या ? मन तो बहुत तरंगें करेगा।

..तो better है मंत्र के साथ आप शिव के पास बैठो या आपके कान सुनें ऐसे ही रुद्राष्टक का पाठ करो ..अक्रिय हो जाओ तो आपको मेरा नम: शिवाय ..आपको मेरा प्रणाम लेकिन बहुत कठिन है।

तो कुछ भी करें ..मोरारी बापू ने कह दिया इसलिये मानना ही ऐसी कोई ज़रूरी बात नहीं ..

शिव के पास बैठकर कुछ ना करो ..बस माँ ..माँ ..माँ ..शिव राजी होंगे ..क्यूँकी शिव माँ हैं ..परम माता है ..परांबा हैं ..शिव और पार्वती को नर और नारी के रूप में मत देखो ..अच्छा किया ऋषी मुनियों ने दोनों को मिलाकर अर्धनारिश्वर रूप बता दिया तसल्ली के लिये ..तत्वत: उसको माँ कहो।

बापू के शब्द
मानस शंकर
जय सियाराम बाप

Read : साधना कब करनी चाहिए

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