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क्या राम भगवान था | Hinduism Ki Asli Sachai

क्या राम भगवान था | Hinduism ki Asli Sachai

क्या राम भगवान था(Kya ram bhagwan tha), ये प्रश्न ही आपने गलत किया है। थोड़ा आदर से बोलो, भगवान श्री राम

मोरारी बापू से  राम कथा में किसी ने पूछा कि

बापू, हमारा 1 प्रश्न है कि हमारा 1 साथी जो लुम्बिनी से है ….आपका पुराना श्रोता है और हाल में ओशो को भी बहुत सुन रहे हैं और वो राम को भगवान नहीं मानते। वो अपने अनुभव को मानते हैं लेकिन इस बात से हम सब का दिल दुखता है।

बापू बोले – कोई बात नहीं ….रावण कहाँ मानता था राम को भगवान? सबको मानना compulsory है क्या?
मानना compulsory नहीं है …..जानना ज़रुरी है ….जानो।

मैं तो कहूँ …किसी को भी ना मानो …जानने की कोशिश करो और अगर मानने में ही तुम्हें रुकना है तो ऐसा मानो कि हमारी बात हम कभी छोडेंगे नहीं ….मानना हो तो ऐसा मानो।

लेकिन हमारी मान्यता 2 कौडी की है।

माताजी ने हमारी factory ठीक से नहीं चलाई ….छोडो दुर्गा सप्तशती का पाठ ….अब हनुमान चालिसा करो और हनुमानजी कुछ कथा में बैठे थे तो ध्यान नहीं दिया 2..3 महीने ….तो कहे हनुमान भी अब कहाँ देखता है?…..छोडो हनुमान चालिसा ….विष्णुसहस्त्र नाम का पाठ करो।

ऐसे हमारी मान्यता बदलती रहती ।
1 जगह मानकर बैठ जाओ तो बात खतम …..बाकी तो …जानो।

मानना महत्व का नहीं ….जानना ज़रुरी नहीं।

बापू के शब्द
मानस सिया
जय सियाराम

अब राम को ना मानने वाले सोच लीजिये क्योंकि रावण भी राम को भगवान नहीं मानता था। 
एक बात सोचने वाली है कि क्यों हर बात सनातन धर्म पर आकर खत्म हो जाती है, क्यों हर बार लोग इसी धर्म से छेड़छाड़ करने की कोशिश करते हैं? हिन्दू धर्म सबसे पुराना है। वेद पुराण रामायण, गीता ये सबके लिए हैं, आप सब इन्हें पढ़िए और इंसानियत सीखिए। लेकिन कुछ तथाकथित धर्म के ठेकेदारों को कुछ ना कुछ चाहिए बोलने के लिए, मुझे लगता है जिन्हें कुछ काम नहीं है ना वो ही जलकर ऐसा करते हैं।
सभी लोग आपस में प्यार से रह सकते हैं लेकिन कुछ लोगों की आदत होती है ना जिस थाली में खाना उसी में छेद करना। खैर, जैसा जिसने सीखा होता है वो वैसा ही करता है।

तो भगवान श्री राम, कितना प्यारा नाम है श्री राम, जय हो। भगवान भी हैं, इंसान के रूप में अवतार भी लिया है, मर्यादा पुरुषोत्तम भी है और सबसे श्रेष्ठ भी है। राम की बात ही छोड़िये जनाब इनका तो नाम भी उनको पवित्र कर देता है जो इन्हें भगवान नहीं मानते। आपकी जिसमे श्रद्धा हो आपको मुबारक। लेकिन राम को लेकर क्यों बहस करते हो। थोड़ा राम जी को पढ़ लो, जान लो, रामचरितमानस की चौपाइयाँ गा लो। जो पवित्र को भी पवित्र कर दे ऐसे हैं श्रीराम। जिनके चरणों से परम पावनी गंगा निकलती है। जिसका जल कभी खराब नहीं होता। जिनके केवल नाम लेने से भव सागर पार हो जाता है, ऐसे हैं मेरे प्यारे श्री राम।

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भगवान राम को जान लोगे तो बस उन्हीं के होकर रह जाओगे। मैं निवेदन करूँ उन लोगों से जो राम को भगवान नहीं मानते कि गलती से भी रामचरितमानस का पाठ मत कर लेना, गलती से भी राम कथा सुन मत लेना, गलती से भी किसी संत महापुरुष से जिज्ञासा मत कर लेना कि क्या राम भगवान था। क्योंकि यदि तुमने ऐसा किया तो तुम्हारी अश्रद्धा एक जगह पड़ी रह जाएगी, तुम अपनी बात से मुड़ जाओगे। फिर खुद ही सोचोगे अरे ये क्या कर दिया हमने, गलती हो गई हमसे तो। बस इतना ही कहूँगा जो रामचरितमानस की ही पंक्ति है कि
अस सुभाउ कहुँ सुनउँ न देखउँ।
भगवान राम का इतना प्यारा स्वभाव मुझे कहीं भी नहीं दिखता है, देखने की तो बात ही छोड़िये साहब, सुनने को भी नहीं मिलता है।

सभी प्रेम से कहिये जय सियाराम!! जय सियाराम!! जय सियाराम!!

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