Navratri  Navratri story(katha) in hindi

Navratri : Navratri story(katha) in hindi

Navratri : Navratri story(katha) in hindi

नवरात्र : नवरात्र कहानी(कथा)

नवरात्रे क्यों किये जाते हैं? Navratri Kyo kiye jate hai?

हम सभी नवरात्री में माँ दुर्गा की पूजा अर्चना करते हैं लेकिन ये जानना भी जरुरी है की नवरात्रे(Navratre) कब से शुरू हुए हैं। और इसके पीछे क्या कारण है? क्या कथाये हैं? आइये माँ को मन से याद करते हुए कथा पढ़िए-

Navratri Story(katha) 1 : नवरात्र कहानी(कथा) 1

एक कथा ऐसी भी आती है की एक दुर्गम(durgam) नाम का राक्षस था। उसने कठोर तप किया और ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया। ब्रह्मा जी ने उन्हें वरदान दे दिया। वरदान पाकर उसने चारों वेद और पुराणों पर कब्ज़ा करके कहीं पर छिपा दिया। जिस कारण वैदिक कर्म बंद हो गए और घोर अकाल पड़ गया। चारों और हाहाकार मच गया। जीव-जंतु मरने लगे। और सृष्टि का विनाश होने लगा। सृष्टि को बचाने के लिए देवताओं ने व्रत रखकर नौ दिन तक माँ जगदंबा की आराधना की और माता से सृष्टि को बचाने की विनती की। तब माँ भगवती व असुर दुर्गम के बीच घमासान युद्ध हुआ। माँ भगवती(Maa bhagwati) ने दुर्गम का वध कर देवताओं को निर्भय कर दिया। तभी से नवदुर्गा तथा नव व्रत का शुभारंभ हुआ।

 

Navratri Story(katha) 2 : नवरात्र कहानी(कथा) 2

एक कथा इस प्रकार आती है जब रावण सीता माता का हरण करके ले गया तब भगवान राम काफी दुखी हुए। और फिर राम-रावण युद्ध होना था। लेकिन भगवान दुखी थे की रावण का वध किस प्रकार किया जाये। लंका-युद्ध में ब्रह्माजी ने श्रीराम से रावण वध के लिए चंडी देवी का पूजन कर देवी को प्रसन्न करने को कहा और बताए अनुसार चंडी पूजन और हवन हेतु दुर्लभ एक सौ आठ नीलकमल की व्यवस्था की गई। वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरता के लोभ में विजय कामना से चंडी पाठ प्रारंभ किया। यह बात इंद्र देव ने पवन देव के माध्यम से श्रीराम के पास पहुँचाई और परामर्श दिया कि चंडी पाठ यथासभंव पूर्ण होने दिया जाए। इधर हवन सामग्री में पूजा स्थल से एक नीलकमल रावण की मायावी शक्ति से गायब हो गया और राम का संकल्प टूटता-सा नजर आने लगा। भय इस बात का था कि देवी माँ रुष्ट न हो जाएँ। दुर्लभ नीलकमल की व्यवस्था तत्काल असंभव थी, तब भगवान राम को सहज ही स्मरण हुआ कि मुझे लोग ‘कमलनयन नवकंच लोचन’ कहते हैं, तो क्यों न संकल्प पूर्ति हेतु एक नेत्र अर्पित कर दिया जाए और प्रभु राम जैसे ही तूणीर से एक बाण निकालकर अपना नेत्र निकालने के लिए तैयार हुए,  तभी आश्विन मास के शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि की आधी रात में श्रीराम और लक्ष्मण के समक्ष भगवती महाशक्ति प्रकट हो गई। देवी उस समय सिंह पर बैठी हुई थीं। भगवती ने प्रसन्न-मुद्रा में कहा- ‘श्रीराम! मैं आपके व्रत से संतुष्ट हूं। और विजयश्री का आशीर्वाद दिया। 

वहीं रावण के चंडी पाठ में यज्ञ कर रहे ब्राह्मणों की सेवा में ब्राह्मण बालक का रूप धर कर हनुमानजी सेवा में जुट गए। निःस्वार्थ सेवा देखकर ब्राह्मणों ने हनुमानजी से वर माँगने को कहा। इस पर हनुमान ने विनम्रतापूर्वक कहा- प्रभु, आप प्रसन्न हैं तो जिस मंत्र से यज्ञ कर रहे हैं, उसका एक अक्षर मेरे कहने से बदल दीजिए। ब्राह्मण इस रहस्य को समझ नहीं सके और तथास्तु कह दिया। मंत्र में जयादेवी… भूर्तिहरिणी में ‘ह’ के स्थान पर ‘क’ उच्चारित करें, यही मेरी इच्छा है। भूर्तिहरिणी यानी कि प्राणियों की पीड़ा हरने वाली और ‘करिणी’ का अर्थ हो गया प्राणियों को पीड़ित करने वाली, जिससे देवी रुष्ट हो गईं और रावण का सर्वनाश करवा दिया। हनुमानजी महाराज ने श्लोक में ‘ह’ की जगह ‘क’ करवाकर रावण के यज्ञ की दिशा ही बदल दी। और राम ने रावण का वध कर दिया। 

 

Navratri Story(katha) 3 : नवरात्र कहानी(कथा) 3

एक कथा आती है की एक महिषासुर(Mahishasura) नाम का दानव था। जो एक भैंस रूपी असुर था। महिषासुर के एकाग्र ध्यान से बाध्य होकर देवताओं ने उसे अजय होने का वरदान दे दिया। इस वरदान को पाकर इसने काफी उत्पात मचाया और अपनी शक्तियों का गलत उपयोग करने लगा। इसने नरक का विस्तार इतना कर दिया की स्वर्ग के द्वार तक नरक पहुंचा दिया। सभी देवता डर गए। महिषासुर ने सूर्य, इन्द्र, अग्नि, वायु, चन्द्रमा, यम, वरुण और अन्य देवताओं के सभी अधिकार छीन लिए हैं और स्वयं स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा। सभी देवता पृथ्वी पर विचरण करने लगे। फिर देवताओं ने देवी दुर्गा की रचना की। ऐसा माना जाता है कि देवी दुर्गा के निर्माण में सारे देवताओं का एक समान बल लगाया गया था। महिषासुर का नाश करने के लिए सभी देवताओं ने अपने अपने अस्त्र देवी दुर्गा को दिए थे और कहा जाता है कि इन देवताओं के सम्मिलित प्रयास से देवी दुर्गा और बलवान हो गईं थी। इन नौ दिन देवी-महिषासुर संग्राम हुआ और अन्ततः महिषासुर-वध कर महिषासुर मर्दिनी(mardini) कहलायीं।

 

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