Tyag aur Niyat Karma : Shrimad Bhagwad Geeta

Tyag aur Niyat karma : Shrimad Bhagwad Geeta

त्याग और नियत कर्म : श्रीमद भागवत गीता

 

गीता ने त्याग की 3 श्रेणी बताई – Three category of Tyag in Gita

1. राजस  त्याग 2. सात्विक त्याग 3. तामस त्याग

1. राजस त्याग(Rajsi Tyag) – प्रत्येक कर्म दुख रूप है, प्रत्येक कर्म में श्रम है और काया का क्लेश होता है। ये सोचकर जो कर्म फेंक देता है वो राजसी त्याग है।

2. सात्विक त्याग(Satvik Tyag) – कर्म तो करेगा लेकिन आसक्ती मुक्त होकर और फल की आशा का त्याग करके जो निरंतर नियत कर्म करता रहता है वो सात्विक त्याग है।

3. तामस त्याग(Tamas Tyag) – मेरे युवान भाई बहन …निषिध कर्म (जो करने योग्य ना हो ऐसे कर्म )उनका त्याग करना ही चाहिये। लेकिन जो नियत कर्म है उसको निरंतर करते रहना चाहिये उसका त्याग मत करो कभी। मोह वश जो नियत कर्म का भी त्याग कर देता है ..वो तामस त्यागी है …

मेरा नियत कर्म(Niyat Karma) है कथा करूँ …यज्ञ करूँ …आखरी व्यक्ती तक पहुंचू ..सब का स्वीकार करूँ ..सब को मोहब्बत करूँ। यदि मैं कहूँ की ये संसार मिथ्या है ये कथा, ये गाना बजाना बकवास है और इस मोह वश ..सबका त्याग करूँ …तो ये मेरा तापस त्याग होगा।

 

मुझे कई लोग कहते हैं ..बापू आप retire कब होंगे?

मैं कहता हूँ …इसमे expire हुआ जाता है …retire नहीं हुआ जाता।

 

मोरारी बापू के शब्द
मानस कन्याकुमारी
जय सियाराम

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