Nidhivan : Vrindavan Raas Sathli Story/katha in hindi

Nidhivan : Vrindavan Raas Sathli Story/katha in hindi

निधिवन : वृन्दावन रास स्थली कथा/कहानी

श्रीधाम वृन्दावन(Vrindavan) में एक स्थान है निधिवन(Nidhivan)। जिसे दिव्य वृन्दावन भी कहते हैं। जो बड़ा ही पवित्र, दिव्य, रहस्यमयी स्थान है। जहाँ आज भी प्रतिदिन रात्रि 12 बजे से सुबह 4 बजे तक रास(Raas) होता है। भगवान श्री कृष्ण अपनी गोपियों के संग, श्री राधा रानी के संग रास रचाते हैं। उस समय निधिवन से सभी व्यक्ति, सभी जीव जंतु वहाँ से चले जाते हैं। वहाँ कोई भी नहीं रुक पाता है।

 

आइये आपको निधिवन जी के अंदर लेकर चलते हैं। जब आप निधिवन में जी में प्रवेश करते हैं आपके अंदर एक दिव्य भाव, रसमय भाव भगवान श्री कृष्ण के लिए जाग्रत होता है। जैसे ही आप निधिवन को देखोगे तो आप अनुभूति करोगे कि ये कोई साधारण जगह नहीं है बल्कि खुद यहाँ भगवान का वास है। निधिवन में प्रवेश करते ही सबसे पहले यहाँ की रज को यहाँ की मिट्टी को अपने मस्तक से लगाइये और राधे राधे गाते जाइये।

 

 

 

निधिवन जी में आपको पेड़ समूह के रूप में मिलेंगे कोई भी single पेड़ आपको दिखाई नहीं देगा। एक काला वृक्ष मिलेगा और एक गौरा। ऐसा दिव्य भाव है कि जो काला वृक्ष है वो साक्षात् कृष्ण हैं और गौरे वृक्ष श्री राधा रानी हैं। एक दूसरे से वृक्ष आलिंगन हैं। प्रत्येक वृक्ष राधा कृष्ण स्वरूप है। सभी वृक्ष ऊपर की तरफ नहीं जमीन की तरफ बढ़ते हैं, झुके रहते हैं और इनका आकार भी मानव जितना ही है। ये सभी वृक्ष रात्रि के समय गोपी कृष्ण बन जाते हैं। ये वृक्ष लगभग 5500 साल पुराने वृक्ष हैं। यहाँ के वृक्षों, लताओं पताओं के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। थोड़ा बंदरों का भी ख्याल भी रखना और अपने सामान का ध्यान रखना। 

 

 

Lalita Kund : ललिता कुंड –

निधिवन में अंदर जाते ही सबसे पहले आपको जो स्थान दिखाई देगा वो है ललिता कुंड(Lalita Kund)। भगवान श्री कृष्ण रास कर रहे थे। तभी ललिता आदि गोपियों को सखियों को प्यास लगी और उन्होंने भगवान से पानी के लिए गुहार लगाई। तब भगवान श्री कृष्ण ने अपनी वंशी से खोदा और सभी गोपियों ने पानी पीया। तब इस कुंड का नाम पड़ा ललिता कुंड। भक्तों के आग्रह के कारण इसे अब पत्थर लगाकर पक्का कर दिया है।

 

 

 

Banke Bihari Prakatya Sathal : बांके बिहारी प्राकट्य स्थल 

ललिता कुंड से आगे आपको एक जगह दिखाई देगी वो है बांके बिहारी जी का प्राकट्य स्थल(Banke Bihari Prakatya Sathal)। इस निधिवन में रात्रि में कोई भी नहीं रह सकता है। हरिदास जी ने निधिवन जी में ही रहकर अपनी संगीत साधना करते थे और इसी साधना के फलस्वरूप एक दिन श्री बांके बिहारी जी को प्रकट कर दिया।

 

 

Rang Mahal  : रंग महल –

भगवान जब रास करते हैं तो भक्तों के मन में भाव होता है भगवान अब थक गए होंगे और उन्हें भूक भी लग आई होगी। इसलिए भगवान के सोने के लिए फूलों की शैया सजाई जाती है। उनके लिए इस महल में लौटा, दातुन, लड्डू, भगवान का श्रृंगार आदि रखा जाता है। यहाँ भगवान का श्रृंगार होता है। प्रसाद के रूप में भी श्रृंगार का सामान दिया जाता है और मंदिर में भी श्रृंगार ही चढ़ता है। सुबह पांच बजे जब ‘रंग महल’ का पट खुलता है तो बिस्तर अस्त-व्यस्त, लोटे का पानी खाली, दातुन कुची हुई और पान खाया हुआ मिलता है। ऐसा लगता है जैसे खुद भगवान यहाँ सोये हैं, उन्होंने लड्डू खाया है। पान चबाया है।

 

Raas Mandal : रास मंडल 

भगवान श्री कृष्ण श्रृंगार करते हैं और फिर इसी जगह पर रास करते हैं। बोलो रास बिहारी भगवान की जय। रास का अर्थ है रस का समूह।

 

 

Vanshi Chori : वंशी चोरी –

यहाँ पर राधा रानी ने भगवान की वंशी चुरा ली थी। क्योंकि ये बंसी हर टाइम भगवान श्री कृष्ण के संग रहती थी। इसलिए लीला में राधा रानी ने वंशी को चुरा लिया। 

 

 

Shri Swami Haridas Samadhi : संगीत सम्राट स्वामी हरिदास जी महाराज की समाधि 

संगीत सम्राट अनन्य नृपति स्वामी हरिदास जी महाराज की भी समाधि निधिवन परिसर में ही है। स्वामी श्री हरिदास जी प्रसिद्ध बैजूबावरा और तानसेन के गुरु थे। स्वामी जी यहीं पर रहकर भगवान की साधना करते, भजन करते और भगवान से लाड लड़ाया करते थे। यहीं पर अनेक भक्तों की समाधि भी श्री निधिवन जी में बनी हुई है।

पढ़ें : हरिदास जी महाराज की कहानी

 

आपको जब भी वृन्दावन जाने का समय मिले तो निधिवन जरूर जाना। निधिवन जाकर आपका ह्रदय गदगद हो जायेगा।

जय जय श्री राधे !!

 

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