Hanumanji ka darshan kaise ho?

Hanumanji ka darshan kaise ho?

हनुमानजी का दर्शन कैसे होगा?

हनुमानजी के दर्शनाभिलाषी Sushmakar Prakash Pathak जी ने प्रश्न पूछा है कि हनुमान जी का दर्शन कैसे होगा?
विधि बताएं कृपया।

इस प्रश्न का जवाब देने का प्रयास किया गया है –
हनुमान जी का दर्शन हो जाये ये आपका हेतु है, और किसी भी हेतु के लिए किया गया प्रयास, कहीं सिर्फ श्रम बनकर न रह जाये, इस बात से सावधान रहें।

इससे अच्छा जो सहज प्राप्त हो जाये, बिना विधि.. बिना श्रम… बिना परिश्रम. उसका स्वाद निराला होगा और जिसका स्वाद निराला हो उसको ही तो प्रसाद कहते हैं ना!

और हाँ प्रसाद केवल और केवल कृपा से ही मिलेगा। आज के युग में ये अपेक्षा करना कि मैं ये…. ये विधि करूँगा तो हनुमानजी मेरे सामने प्रकट हो जायेंगे.. ये खुद के लिए मन को बहलाने की बातें हैं।

हनुमानजी का दर्शन करने के लिए तत्व को समझना बहुत जरुरी है।

हनुमानजी क्या हैं?
पवन तत्व है। जिसको किसी चीज का भेद नहीं है। ना देश का, ना छोटे बड़े का.. कोई भेद नहीं। 
तो जहाँ ऐसा कोई इंसान ही.. ऐसा विचार हो.. ऐसी वाणी हो… ऐसा वर्तन हो.. जहाँ समानता हो.. जहा भेद ना हो.. वहाँ हनुमानजी का दर्शन करो।

हनुमानजी को साक्षात् देखने की अंधी दौड़ में मत खोना खुद को… अगर तुम खुद परोपकार का कुछ काम करते हो.. मुख में राम नाम लेकर.. तो तुम खुद में भी हनुमान का दर्शन करो।

मैंने इतना सब लिख दिया है…. लेकिन अगर तुमको ये विचार रास ना आता हो.. अगर तुमको कोई विधि ही करनी है तो हनुमान जी को पाने की 1 विधि है और वो है केवल राम नाम।

उठते बैठते सोते जागते.. जैसे चाहो वैसे.. जब चाहो वैसे.. बस राम बोलो.. और मेरा हनुमान दौड़ा आएगा ढूढ़ने हुए कि किसने मेरे प्रभु का नाम लिया और तुम्हारी पात्रता हो तो कर लेना दर्शन वो जब आये तब।

शब्द : रूपा खांट

अंत में एक बात कहूँगा कि विधि आप जरूर करो, नाम आप जरूर लो, पूजा आप जरूर करो.. उसका फल जरूर मिलेगा लेकिन केवल क्रिया से नहीं, वो प्रेम से मिलता है। आपके ह्रदय में भगवान के लिए कितना प्रेम है। जैसे एक बालक माँ को पुकारता है, भूखा होता है तब रोता है और माँ दौड़ी दौड़ी आती है, ऐसे ही जब हमारे प्रेम में वो करुण पुकार होगी तब वो आएंगे। उनको आना ही पड़ेगा।

जय सियाराम

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