Hanuman Shani Dev Story in hindi

Hanuman Shani Dev Story in hindi

हनुमान और शनि देव की कहानी

Hanuman or Shani dev ki kahani

हनुमान जी राम जी के भक्त हैं। अपने प्रभु श्री राम जी के भजन में लगे रहते हैं। इन पर कोई भी विपदा आ नहीं सकती। कोई विपदा आती भी है तो राम नाम के सहारे दूर हो जाती है।

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शनि देव के बारे में कहा जाता है कि वे न्याय के देवता हैं। और प्रत्येक के जीवन में शनि की साढ़े साति जरूर आती है। जिसे “शनि साढ़े साती” या “शनि की ढैय्या” कहते हैं। इसमें शनि देव 7 1⁄2 साल तक व्यक्ति के जीवन में अपना कोप दिखते हैं। ऐसा पढ़ने और सुनने में आता है। कुछ ऐसा ही हनुमान जी के साथ भी हुआ।
हनुमान जी और शनि देव की एक कथा बड़ी प्रचलित है। एक बार शनि देव हनुमान जी के पास पहुंचे। हनुमान जी उस समय अपने प्रभु श्री राम के ध्यान में मगन थे। श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम।

अब शनि देव हनुमान जी से कहते हैं- हनुमान जी! अब हम आप पर अपना असर दिखाएंगे। और साढ़े सात साल तक आप पर कोप बनकर रहेंगे। हनुमान जी कहते हैं भैया! अच्छी बात है। आपकी दशा हमारे ऊपर रहेगी तो दोनों मिलकर राम का भजन करेंगे।

फिर हनुमान जी पूछते हैं कि आप कैसे हमारे ऊपर रहेंगे?

शनि देव कहते हैं – मैं ढाई वर्ष प्राणी के सिर पर रहकर उसकी बुद्धि विचलित बनाए रखता हूं।

फिर ढाई वर्ष उसके पेट वाले भाग में रहकर उसके शरीर को अस्वस्थ बनाता हूं व अंतिम ढाई वर्ष उसके पैरों में रहता हूँ।

शनि देव ने बड़े ही गर्व के साथ ये बात कही। हनुमान जी बोले आप हमारे सिर पर आ जाइये। आपका स्वागत है।

ऐसा कहते ही शनि देव ने हनुमान जी के सिर पर डेरा जमाया। जैसे ही शनिदेव हनुमान जी के सिर पर आये तो हनुमान जी का राम के भजन में मन नहीं लगा। हनुमान जी ने सोच लिया अब तो शनि देव रहेगा या मैं रहूँगा। ऐसा कहकर हनुमान जी अपनी गदा उठा ली। और अपने सिर पर जोर से मार के कहा- जय श्री राम !

जैसे ही गदा मारी शनि देव जी की हालत खराब हो गई। शनि देव तुरंत सिर से पेट पर चले गए। हनुमान जी ने फिर एक गदा पेट पर मारी। शनि देव से अब दर्द से करहा उठे। और शनि देव हनुमान जी के पैरों में चले गए।

अब हनुमान जी ने अपने पैरों में एक जोर से गदा मारी और शनि देव तो हनुमान जी के चरणों में गिर पड़े हैं। और उनसे दर्द सहन नहीं हो रहा है। गदा का दर्द इतना भयंकर था कि शनि देव से वह पीड़ा सहन नहीं हुई। तब शनि देव ने हनुमान जी से माफ़ी मांगी।

Shani Dev ko tail kyo chadaya jata hai : शनि देव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है 

 

अब हनुमान जी को भी शनि देव पर दया आ गई और चिरंजीवी हनुमानजी ने उनके शरीर पर तेल लगाकर उनकी पीड़ा को कम किया।

यही कारण है उस दिन के बाद से शनिदेव को तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई। जो भी व्यक्ति शनिदेव पर तेल चढ़ाता है, उसके जीवन की परेशानियां दूर हो जाती है।

एक कथा ऐसी भी आती है कि रावण ने सभी ग्रहों को अपना बंधी बना रखा था। उसी समय हनुमानजी भगवान राम के दूत बनकर लंका गए हुए थे। हनुमान जी ने उस समय लंका को जला दिया था। क्योंकि रावण ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगवा दी थी। लंका जलने के बाद सारा ग्रह तुरंत वहां से भाग गए लेकिन उशनि नहीं भाग पाए क्योंकि वो उल्टा लटके हुए थे।

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शनि के शरीर में असहनीय पीड़ा हो रही थी और उनसे दर्द सहन नहीं हो रहा था। तब हनुमान जी ने शनि देव को देखा और उनके शरीर पर तेल से मालिश की थी। जैसे ही हनुमान ने जय श्री राम कहकर शनि के शरीर पर तेल लगाया तो शनि देव का सारा दर्द तुरंत छूमंतर हो गया।

तबसे शनि ने कहा था कि जो भी व्‍यक्ति श्रद्धा भक्ति से मुझ पर तेल चढ़ाएगा उसे सारी समस्‍याओं से मुक्ति मिलेगी। तभी से शनिदेव पर तेल चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई थी।

यहाँ पर शनि देव ने एक बात और कही थी कि हनुमान जी मैं आपको भक्तों पर कभी भी अपना कोप नहीं दिखाऊगा और ना ही मेरी साढ़े सती की दशा आपके भक्तो को कोई नुकसान पहुंचाएगी।

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