Swami Shri Haridas Maharaj

Swami Shri Haridas Maharaj

Swami Shri Haridas ji maharaj was true devotee of Shri Radha krishna. He was a saint and bhagat. He always chanting and singing for Shri Radhey krishna . He was guru of Tansen and Baiju Bawra. Here’s Story of Bankey bihari parkat by Shri Haridas ji maharaj. 

Bankey Bihari Parkat Katha(बांके बिहारी प्रकट कथा )

स्वामी श्री हरिदास जी महाराज को कौन नही जानता होगा। स्वामी श्री हरिदास जी महाराज सम्राट तानसेन और बैजू बावरा के गुरु है । स्वामी हरिदास ने तानसेन और बैजू बाबरा को संगीत की शिक्षा दी थी।   स्वामी जी ने अपनी संगीत साधना से बांके बिहारी जी को प्रकट कर दिया , ये बांके बिहारी जी और कोई नहीं साक्षात् श्री राधा कृष्ण है। 

वृंदावन में स्थित श्रीकृष्ण की रास-स्थली निधिवन में बैठकर भगवान को अपने संगीत से रिझाया करते थे।निधिवन मे रास लीला हुई थी ओर आज भी निरन्तर हो रही है । स्यामा-स्याम के साथ हरिदास जी लाड लड़ाया करते थे । भगवान की भक्ति में डूबकर हरिदास जी जब भी गाने बैठते तो प्रभु में ही लीन हो जाते। और उन्हें गोदी में बिठा लिया करते थे।
प्रतिदिन की तरह स्वामी जी आज भी बिहारी जी के लिए गए रहे थे और भाव में डूब रहे थे। इनके शिष्ये इनसे कहा करते थे की गुरुदेव जिस छवि का आप दर्शन करते है उसका दर्शन हमें भी करवाइये। भगवान इनके भजन से रीझकर युगल सरकार श्री राधा कृष्ण इनके सामने प्रकट हो गए। इन्होने इतने प्रेम में डूबकर रो-रो कर गया –
“माई री, सहज जोरी प्रगट भई, जु रंग की गौर-स्याम घन-दामिनि जैसैं।
प्रथम हूँ हुती, अब हूँ आगें हूँ रहिहै, न टरिहै तैसैं॥
अंग-अंग की उजराई-सुघराई-चतुराई-सुन्दरता ऐसैं।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा-कुंजबिहारी, सम वैस-वैसैं।।”

जब श्री राधा कृष्ण प्रकट हुए है तो स्वामी जी ने जी भर के उन्हें निहारा है । और जब उनकी नजर कृष्ण जी से राधा जी पर गई तो थोड़े दुखी हो गए । कृष्ण जी पूछते है की बाबा हम प्रकट हुए आपको इसकी खुशी नहीं हुई क्या ?
तब हरिदास जी कहते है की नही-नही ऐसी बात नहीं है , आप जानते हो की मै एक संत हुं। मेरे पास एक करवा है , एक लंगोटी है और एक चादर है । आपको लोटे मे पानी पिला दूंगा , लंगोटी पहना दूंगा और चद्दर उड़ा दूंगा लेकिन हमारी किशोरी जी को तो नए नए श्रृंगार की जरुरत होगी ना वो मै कहाँ से लाऊंगा? और आपका तेज-ओज बहुत ज्यादा है लोगो से वो सहन भी नहीं होगा ।
तब भगवन कहते है की हरिदास जी बस इतनी सी बात है , हम आपकी समस्या दूर कर देते है। भक्त की बात सुनकर श्रीकृष्ण मुस्कराए और राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी एकाकार होकर एक विग्रह के रूप में प्रकट हुई। हरिदास जी ने इस विग्रह को ‘बाँकेबिहारी’(Bankey Bihari) नाम दिया।

Why  Bankey Bihari(Krishna)is  Black?  

बांके बिहारी काले क्यों हैं? 

यही कारण है की बांके बिहारी जी काले है। लोगो से उनका तेज सहन नही हो पाया था । उन्होंने अपने ओज को काम कर दिया ओर काले होने के बाद भी वो बहुत खूबसूरत हैं ।

वृन्दावन मे एक ओर का बिहारी जी का श्रृंगार कृष्ण का होता है और दूसरी ओर श्री राधा जी का ।  
लेकिन जो वृन्दावन मे बांके बिहारी है वो किसी मूर्तिकार ने नहीं बनाये है वो साक्षात श्री राधा कृष्णा है । बाँके बिहारी के विग्रह में राधा-कृष्ण दोनों ही समाए हुए हैं, जो भी श्रीकृष्ण के इस विग्रह का दर्शन करता है, उसकी मनोकामनाएँ पूरी होती हैं।

भगवान श्रीकृष्ण अपने भक्त के कष्टों को दूर कर देते हैं।

Read Bankey Bihari ke Chamatkar story 

http://www.hindi-web.com/stories/bankey-bihari-ke-chamatkar-story-1/

Bankey bihari Live Darshan in Vrindavan (बांके बिहारी जी के लाइव दर्शन)


बोलिए श्री वृन्दावन बिहारी लाल की जय ! ( Boliye Shri Vrindavan Bihari lal ki Jai )

“जय जय श्री राधे” “Jai Jai Shri Radhey”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *