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Meerabai Love Letter to Krishna in hindi

Meerabai Love Letter to Krishna in hindi

मीराबाई का भगवान कृष्ण के लिए प्रेम पत्र

 

मीराबाई भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त हैं। मीरा बाई जी ने भगवान श्री कृष्ण को अपना पति माना। मीरा बाई ने सिर्फ कृष्ण को अपना माना इसलिए उन्होंने लिखा कि मेरे तो गिरधर गोपाल, दुसरो नहीं कोय।

 

सिर्फ कृष्ण जी मेरे हैं, दूसरा और कोई भी नहीं। वो तो हम ही है जो सबको अपना माने बैठे हैं जैसे माता, पिता, पत्नी, पुत्र, पुत्री, बहन, और आज कल तो गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड। लेकिन क्या ये सब हमारे हैं? थोड़ा सोचा? वास्तव में तो भगवान ही हमारे हैं।

 
मीरा भाई के अनेक भाव हैं। पूज्य श्री गौरव कृष्ण गोस्वामी जी से एक बार भागवत कथा में ये भाव सुना और बेहद पसंद आया। इस भाव में मीरा का कृष्ण के प्रति विरह और प्रेम दोनों है। हम ऐसे भाव तो बना नहीं सकते लेकिन बने बनाये भाव में उस प्रेम का दर्शन कर सकते हैं। आज मीरा बाई जी भगवान को एक पत्र लिखने जा रही हैं। लेकिन मीरा बाई लिख ही नहीं पा रही है। आप इस कविता का थोड़ा दर्शन तो कीजिये। मीरा बाई जी कह रही हैं–

पतियाँ मै कैसे लिखूँ, लिखी ही ना जाय।
कलम धरत मेरो कर काँपत है और नैन रहे झड़ाये।

बात कहुँ तो कहत न आवै, जीव रह्यो डरराय।
बिपत हमारी देख तुम चाले, कहिया हरिजी सूं जाय।

मीराँ के प्रभु गिरधरनागर चरण कमल रखाय ।।

अर्थ : मीरा जी कहती हैं- मैं पत्र कैसे लिखूं लिखा ही नहीं जा रहा है। जब मैं हाथ में कलम पकड़ती हूँ तो मेरे हाथ कंपनी लग जाते हैं। तुम्हारी याद आ जाती हैं और आँखों से आंसूं झरने लगते हैं, बहने लगते हैं।
जब कुछ बात कहना चाहती हूँ तो वह कही नहीं जाती, कहनी नहीं आ रही और मेरा जी(दिल) घबराने लगता है, डर लगने लगता है।
हे श्याम सुंदर तुम हमारी विपदा को देख कर चले गए। ये ठीक बात नहीं है आपकी, और यह विपदा हरि से कहने से ही जाएगी। और कोई उपचार भी नहीं हो सकता इसका।
अंत में मीरा जी कहती हैं मीरा के प्रभु गिरधर नगर मुझे हमेशा अपने चरण कमल में ही रखना।
वाह, अद्भुत प्रेम है मीरा जी का। हम भगवान से कहते हैं, प्रभु हमें सुख में रखना, दुःख ना देना लेकिन मीरा बाई तो कहती है प्रभु! हमे तो सिर्फ और सिर्फ अपने चरण कमलों में रखना। अगर हम आपके चरण कमलों में रहेंगे तो सुख दुःख का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। क्योंकि आपके चरण कमल तो दुःख के लिए काल है।

Read : मीराबाई की सम्पूर्ण कथा

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