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Meerabai Complete Story/Katha in hindi

Meerabai Complete Story/Katha in hindi

मीराबाई की सम्पूर्ण कहानी/कथा

मीरा बाई भगवान श्री कृष्ण की अनन्य भक्त थी। मेरी दृष्टि में श्री राधा रानी के बाद भगवान श्री कृष्ण की कोई प्रेयसी है तो सिर्फ मीरा बाई ही है। गोपियाँ भी प्रेम की पराकाष्ठा है लेकिन मीरा बाई तो इस कलयुग में भगवान की पत्नी कहलाती है।

संत महात्मा बताते हैं कि मीराबाई श्री कृष्ण के समय की एक गोपी थी।
भगवान कृष्ण को पाने वाले लोग कहते हैं हमें भगवान मिलते नहीं हैं, भगवान हमें दर्शन देते नहीं हैं जबकि मीरा बाई जी को देते हैं तो सिर्फ 2 लाइन पढ़ लीजिये आपको पूरा कारण मिल जायेगा।

मीरा बाई जी कहती हैं– मेरे तो गिरधर गोपाल, दुसरो न कोय।

हम सभी भगवान से कह देते हैं प्रभु आप हमारे हैं लेकिन इसकी दूसरी पंक्ति हम नहीं कह पाते कि प्रभु आपके अलावा हमारा और कोई भी नहीं है। सिर्फ आप ही हमारे हैं। हम पत्नी को भी अपना माने बैठे हैं, पति को भी, बच्चों को भी, गर्लफ्रेंड, बॉयफ्रेंड, और न जाने किस किस को अपना कहते हैं। क्या वे वास्तव में अपने हैं?

मीरा बाई ने तो कह दिया मेरे तो सिर्फ गिरधर गोपाल जी हैं। दूसरा कोई भी नहीं। जिस दिन हमारे ह्रदय में इस तरह सच्चा भाव आएगा यहीं मानना भगवान खुद ही आपको अपनी पलकों पर बैठ लेंगे।

Meera bai ki jivani in hindi : मीराबाई की जीवनी

अब थोड़ा मीरा बाई जी का चरित्र पढ़िए–

Meera Bai ka janam : मीराबाई का जन्म 

मीरा बाई जी का जन्म मेड़ता, राजस्थान में हुआ। इनके पिता रत्न सिंह थे। मीरा का सम्बन्ध एक राजपूत परिवार से था। जब ये छोटी थी तभी इनकी माँ का देहांत हो गया था तो इनके दादा राव दूदा ने इन्हे पाला था।

एक बार बारात जा रही थी। सभी बच्चे उस बारात को देख रहे थे। उन बच्चों में एक मीरा भी थी। तभी घोड़े पर बैठा हुए दूल्हे को देखकर मीरा ने अपनी माँ से पूछा- ये कौन है?

माँ ने कहा – बेटी ये दूल्हा है।

मीरा ने कहा- फिर मेरा दूल्हा कहाँ है?

माँ ने मीरा को उस समय समझाने के लिए भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को मीरा के हाथ में देकर कहा- ये तुम्हारा दूल्हा है।

मीरा बाई को ये बात दिल में बैठ गई। मेरे पति, मेरे दूल्हे तो केवल श्री कृष्ण, सांवरे सलोने हैं। अब मीराबाई दिन रात उन्ही सांवरे सलोने के साथ खेलती, उनसे बात करती।

Meerabai Marriage Story in hindi  : मीराबाई के विवाह की कथा

मीराबाई का विवाह उदयपुर के महाराणा कुंवर भोजराज के साथ हुआ। जो उदयपुर के महाराणा सांगा के पुत्र थे।

विवाह के लिए पहले तो मीराबाई ने मना कर दिया था, लेकिन परिवार वालों के अत्यधिक बल देने पर वह तैयार हो गईं। जिस समय मीरा बाई के फेरे चल रहे थे उस समय भी मीरा बाई भगवान श्री कृष्ण का श्री विग्रह लेकर बैठी थी। मीराबाई ने भगवान श्री कृष्ण के लिए सांसारिक लज्जा और लोक परम्परा का पूरी तरह से त्याग कर दिया।

Meerabai ke Guru  : मीरा बाई के गुरु 

मीराबाई के गुरु श्री रैदास जी थे। जिन्हे संत रविदास के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने ही मीरा जी को श्री कृष्ण नाम के मन्त्र की दीक्षा दी थी। जब सच्चा सद्गुरु मिल जाये तो फिर भगवान का मिलना भी निश्चित ही है। इसमें कोई संदेह की बात नहीं है। रैदास जी ने मीरा का भगवान श्री कृष्ण के प्रति प्रेम देखा और उन्हें अपनी शिष्या बना लिया।

विवाह के कुछ समय बाद ही उनके पति भोजराज का देहान्त हो गया। पति की मृत्यु के बाद उन्हें पति के साथ सती करने का प्रयास किया गया किन्तु मीरा इसके लिए तैयार नही हुईं।

इसके बाद इनके सौतेले भाई विक्रमादित्य राणा बने। राणा ने अपनी बहन ऊदाबाई को भी मीरा को समझाने के लिए भेजा, लेकिन मीरा जी की भक्ति पर इस बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। वे कुल मर्यादा को छोड़कर साधु संतों के समाज में बैठ जाती और खूब कीर्तन करती रहती। भगवान के मंदिर में , भगवान के प्रेम में खूब गाती, कृष्ण प्रेम रोती और नाचती थी।
ये सब विक्रमजीत सिंह को बिलकुल भी पसंद नहीं आता था। कहते हैं कि मीरा बाई को मारने के लिए दो बार इन्होने प्रयास भी किया। एक बार के एक बार फूलों की टोकरी में एक जहरीला साँप भेजा गया, लेकिन टोकरी खोलने पर उन्हें कृष्ण की मूर्ति मिली।
दूसरी बार मीरा जी को विष का प्याला दिया गया। मीरा ने विष के प्याले को भगवान का चरणामृत समझकर पि लिया। मीरा जी को ये विष कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाया।

Meera Bai ka Tulsidas ji Ko Letter Likhna : मीरा का तुलसीदास को पत्र 

जब अति हो गई तब मीराबाई ने श्री तुलसीदास जी को एक पत्र लिखा। मीराबाई पत्र में लिखती हैं- मेरे पति की मृत्यु होने के बाद मुझे ससुराल में काफी कष्ट दिया जा रहा है। मुझे भगवान कृष्ण से दूर किया जा रहा है। आप मेरे लिए आज्ञा कीजिये।

तुलसीदास जी ने इस पत्र को पढ़कर जवाब दिया –

जाके प्रिय न राम वैदेही
तजिए ताहि कोटि बैरी सम, जद्यपि परम सनेही ।

तुलसीदास जी कहते हैं- आपका कोई भी कितना भी प्यारा क्यों न हो, यदि वह भगवान(राम) से प्यार नहीं करता, जो भगवान की भक्ति में बढ़ा बनता है उसे तो करोड़ बेरियों के सामान त्याग देना चाहे ।

 

Meerabai Goes to Vrindavan hindi Story  : मीरा का वृन्दावन जाना 

इस पत्र का जवाब मिलते ही मीराबाई जी यहाँ से चलकर श्रीधाम वृन्दावन में पहुंची। वहां पर मीराबाई जी जीव गोस्वामी के दर्शन के लिये गईं। गोस्वामी जी का नियम था कि वो किसी भी स्त्री से नहीं मिलते थे और ना ही किसी स्त्री का चेहरा देखते थे। उन्होंने मीराबाई से मिलने के लिए मना कर दिया। और सेवक को उत्तर देकर कहलवा दिया कि- “हम पुरुष हैं और हम स्त्रियों से नहीं मिलते”।

मीराबाई जी जीव गोस्वामी जी की इस बात पर हंसी और बड़े प्रेम से बोली- हमने तो सुना था कि वृन्दावन में केवल एक ही पुरुष(कृष्ण) है। यहाँ पर दूसरा पुरुष कहाँ से पैदा हो गया?
ऐसा उत्तर सुनते ही गोस्वामी जी दौड़े दौड़े आये मीरा बाई जी के चरणों में गिर गए। और कहते हैं- आप जैसे कृष्ण प्रेमी, आप जैसे कृष्ण भक्त दुनिया में बिरले ही होते हैं । आपने आज मेरी आँखें खोल दी । इस कथा का उल्लेख प्रियादास जी के कवित्तों में मिलता है।

मीरा जी वृन्दावन में रहने के बाद यहाँ से द्वारिका चली गई। क्योंकि मीरा बाई जी सोचती है एक स्त्री का तो अपने पति की ससुराल में ही रहना उचित है। मेरे पति गिरधर गोपाल हैं और मेरी ससुराल द्वारका। ऐसा मन में विचार करके मीराबाई द्वारिका में आई। और यहाँ पर खूब भगवान का भजन गाती, कीर्तन करती, साधु संतों का जीवन जीती। संधू संतों के संग सत्संग, कीर्तन और भजन निरंतर करती थी।

Meerabai Death Story in hindi : मीरा बाई की मृत्यु

यहां पर ही वो कृष्ण भक्ति करते-करते श्रीकृष्ण की मूर्ति में समां गईं। सिर्फ मीराबाई जी की साड़ी का एक छोर मूर्ति के पास मिला। मीराबाई सशरीर ही भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति में समां गई थी। भगवान ने उन्हें अपने लोक में स्थान दे दिया था।

बोलिये कृष्ण भक्त मीरा बाई जी की जय!!

Read : कृष्ण मुस्लिम भक्त रसखान जी की कथा

14 thoughts on “Meerabai Complete Story/Katha in hindi

  1. ek dum sahi hai bhakti main anand milta hai or kisi main ni ram ram ram ram ram har din jap kro prabhu ka name dosto kaliyug se mukti miljayegi koi bi god ka name jap kro daily

    • haanji.. bhagwan ka naam hi sab dukho se hame mukti dila sakta hai. kalyug me bhagwan ka naam hi hai jo hame bhagwan ki prapti karwa sakta hai.

    • meera bhagwan ki bhakt hai… bhakt ke sath bura karne ka jo soche uska jarur bura ho sakta hai.. Jai Shri Krishna 🙂

    • love show no external wounds.but the pain pervades every pore devotee mira offer her body as a sacrifice for ever.

      onka roop hi sansar hai aur kya bolu . bhakti ka koi vesh aur dharm nahi hota bas pyar ho jata hai .mai muslim hoo khuda ne mujhe bhi banaya.jab bhi inko dekhta hoon ek pyar ka ehsaas hota hai inke saath …jai mere kanhaiyya lal ki…..

  2. love show no external wounds.but the pain pervades every pore devotee mira offer her body as a sacrifice for ever.

    onka roop hi sansar hai aur kya bolu . bhakti ka koi vesh aur dharm nahi hota bas pyar ho jata hai .mai muslim hoo khuda ne mujhe bhi banaya.jab bhi inko dekhta hoon ek pyar ka ehsaas hota hai inke saath …jai mere kanhaiyya lal ki…..

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