Nidhivan : Vrindavan Raas Sathli Story/katha in hindi

Nidhivan : Vrindavan Raas Sathli Story/katha in hindi निधिवन : वृन्दावन रास स्थली कथा/कहानी श्रीधाम वृन्दावन(Vrindavan) में एक स्थान है निधिवन(Nidhivan)। जिसे दिव्य वृन्दावन भी कहते हैं। जो बड़ा ही पवित्र, दिव्य, रहस्यमयी स्थान है। जहाँ आज भी प्रतिदिन रात्रि 12 बजे से सुबह 4 बजे तक रास(Raas) होता है। भगवान श्री कृष्ण अपनी गोपियों के […]

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Narsingh Jayanti/Chaturdashi Wallpaper and Story in hindi

Narsingh Jayanti/Chaturdashi Wallpaper and Story in hindi नरसिंह जयंती/चतुर्दशी वॉलपेपर, फोटो और कहानी   नरसिंह जयंती(Narsingh jayanti) वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाती है।  प्रल्हाद जी नरसिंह भगवान(Narsingh Bhagwan) के परम भक्त थे। भक्त प्रल्हाद के कारण वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को नरसिंह भगवान(Narsingh Bhagwan) खम्बे से प्रकट हुए […]

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Bankey Bihari(Shri Krishna) ke Chamatkar Story 7 

Bankey Bihari(Shri Krishna) ke Chamatkar Story 7  : बांके बिहारी(श्री कृष्ण) के चमत्कार कथा 7    आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी के शब्द  (बांके बिहारी के चमत्कार – गुरुग्राम कथा )   एक दिल्ली का ही भक्त परिवार, बिहारी जी को जिसने सुना… बात थोड़ा पुरानी है, घटना थोड़ी पुरानी है। जबसे भागवत की कथा […]

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Tyag aur Niyat Karma : Shrimad Bhagwad Geeta

Tyag aur Niyat karma : Shrimad Bhagwad Geeta त्याग और नियत कर्म : श्रीमद भागवत गीता   गीता ने त्याग की 3 श्रेणी बताई – Three category of Tyag in Gita 1. राजस  त्याग 2. सात्विक त्याग 3. तामस त्याग 1. राजस त्याग(Rajsi Tyag) – प्रत्येक कर्म दुख रूप है, प्रत्येक कर्म में श्रम है और काया का क्लेश होता […]

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भगवान श्री कृष्ण सभी रस/मनोकामना पूरी करते हैं

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भगवान श्री कृष्ण सभी रस/मनोकामना पूरी करते हैं Lord Krishna sabhi Ras/Desires puri karte hai    इन्द्रियाँ इतनी भूखी हैं …..कहाँ कहाँ अलग अलग(बिलग बिलग)रस खोजोगे?   1 कृष्ण में लग जाओ। दुनिया के सभी रस मौजूद हैं क्योंकि भगवती श्रुति उसे रसो वै स: कहती है। पढ़ें : कृष्ण महारास की कथा   तुम्हारी […]

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Gopi Pranaya Geet (Bhagwat Puran) in hindi and Sanskrit

Gopi Pranaya Geet (Bhagwat Puran) in hindi and Sanskrit गोपी प्रणय गीत (श्रीमद भागवत महापुराण)   श्रीगोप्य ऊचुः । (गोपियाँ गाती हैं) मैवं विभोऽर्हति भवान् गदितुं नृशंसं सन्त्यज्य सर्वविषयांस्तव पादमूलम् । भक्ता भजस्व दुरवग्रह मा त्यजास्मान् देवो यथाऽऽदिपुरुषो भजते मुमुक्षून् ॥ ३१ ॥ अर्थ :  गोपियों ने कहा – प्यारे श्रीकृष्ण! तुम घट-घट व्यापी हो। […]

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